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नकली का 250, असली का खेलवां19एपिसोड

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नकली का 250, असली का खेल

रणवीर मेहता, मेहता ग्रुप का असली बेटा, बिछड़ने के बाद घर लौटता है। वह परिवार के लिए जान लगा देता है और कंपनी को सालाना तीस हज़ार करोड़ दिलाता है, लेकिन सालाना जश्न पर नकली बेटा सिद्धांत उसे सिर्फ 250 युआन का बोनस देकर बेइज्जत करता है और उसके अपने माता-पिता व बहन भी नकली का साथ देते हैं। अब रणवीर का धैर्य टूट चुका है, वह घर छोड़कर मेहता ग्रुप को सबक सिखाने की तैयारी करता है। क्या रणवीर अपने ही परिवार को हरा पाएगा? और यह लड़ाई कहाँ तक जाएगी?
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इस एपिसोड की समीक्षा

सफेद सूट वाले का घमंड

सफेद सूट वाला व्यक्ति कितना घमंडी लग रहा है। उसकी मुस्कान में चालाकी साफ दिखती है। काले सूट वाले शांत हैं पर आंखों में आग है। यह पेटेंट कॉन्फ्रेंस में हंगामा होने वाला है। नकली का २५०, असली का खेल में ऐसे ट्विस्ट पसंद हैं। फोन कॉल ने सब बदल दिया। भूरे सूट वाले बुजुर्ग का रिएक्शन देखकर लगता है गेम पलटने वाला है। सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। दर्शक बंधे रहते हैं।

काली पोशाक वाली का साहस

काली पोशाक वाली ने फोन उठाया और सीन टर्न हो गया। उसकी आंखों में डर था पर हिम्मत भी थी। सफेद सूट वाले को लगता था वह जीत गया है। पर असली खेल अब शुरू हुआ है। नकली का २५०, असली का खेल की स्टोरी लाइन बहुत टाइट है। बैकग्राउंड म्यूजिक और एक्सप्रेशन परफेक्ट हैं। हर कोई किसी का इंतजार कर रहा था। अब अगला पार्ट देखने को उत्सुक हैं। कहानी में जान है।

कॉन्फ्रेंस हॉल की टेंशन

कॉन्फ्रेंस हॉल में जो टेंशन थी वो स्क्रीन के पार महसूस हुई। सफेद सूट और काले सूट के बीच की ड्यूल देखने लायक थी। सब लोग चुप चाप खड़े थे पर माहौल गरम था। नकली का २५०, असली का खेल में यह सीन हाईलाइट है। फोन कॉल वाला ट्विस्ट अनएक्सपेक्टेड था। बुजुर्ग व्यक्ति गुस्से में आ गए। लगता है कोई बड़ा राज खुलने वाला है। एक्टिंग नैचुरल लगी। दर्शक पसंद करेंगे।

विलेन कौन है असल में

पहले लगा सफेद सूट वाला विलेन है, पर शायद कुछ और ही है। काली पोशाक वाली की कॉल ने सबकी नींद उड़ा दी। कॉन्फ्रेंस बीच में रुक गया सबकी नज़रें फोन पर थीं। नकली का २५०, असली का खेल का हर एपिसोड रोमांचक अंत देता है। बैठक कक्ष वाला सीन भी इंपोर्टेंट लग रहा है। वहां बैठे लोग भी परेशान हैं। स्टोरी कॉम्प्लेक्स होती जा रही है। मजा आ रहा है।

क्लासी कॉस्ट्यूम डिजाइन

कॉस्ट्यूम डिजाइन बहुत क्लासी है। सफेद सूट की टेक्सचर और काली पोशाक की चमक ध्यान खींचती है। लाइटिंग भी ड्रामेटिक थी। नकली का २५०, असली का खेल की प्रोडक्शन क्वालिटी अच्छी है। एक्सप्रेशन से कहानी समझ आ रही है। डायलॉग कम पर असर ज्यादा है। फोन स्क्रीन का क्लोज अप भी अर्थपूर्ण था। अब पता चला पावर किसके पास है। दृश्य बहुत सुंदर हैं।

भूरे सूट वाले की एंट्री

भूरे सूट वाले बुजुर्ग का एंट्री फोन कॉल के साथ हुआ। उनका गुस्सा देखकर लगता है वो बॉस हैं। सफेद सूट वाला अब मुस्कुरा नहीं पाएगा। नकली का २५०, असली का खेल में पावर डायनामिक्स बदल रहे हैं। बैठक कक्ष का सेटिंग आलीशान था। वहां की नीली पोशाक वाली भी चिंतित लग रही थीं। सब कुछ कनेक्ट हो रहा है। यह सीरीज एडिक्टिव है। देखते रहना चाहेंगे।

अंत में सस्पेंस

अंत में जो जारी रहेगा आया वो दिल को छू गया। अधूरा पन है पर एक्साइटमेंट भी है। कौन था फोन पर और क्या कहा गया। नकली का २५०, असली का खेल के प्रशंसक को यह पसंद आएगा। काले सूट वाले की चुप्पी शोर मचा रही थी। सफेद सूट वाला अब घबरा गया है। सीन चेंज हुआ पर टेंशन वही है। अगला भाग का इंतजार मुश्किल होगा। धैर्य रखना पड़ेगा।

पात्रों की केमिस्ट्री

सभी पात्रों के बीच की केमिस्ट्री इंटरेस्टिंग है। कोई साइड ले रहा है कोई चुप है। सुनहरी पोशाक वाली भी कुछ जानती लगती है। नकली का २५०, असली का खेल में हर पात्र इंपोर्टेंट है। कॉन्फ्रेंस का माहौल रियलिस्टिक लगा। लोगों की रिएक्शन नैचुरल थीं। फोन कॉल ने सबको हिला कर रख दिया। अब क्या होगा कोई नहीं जानता। अनुमान लगाना मुश्किल है।

इमोशनल डेप्थ

काली पोशाक वाली के चेहरे पर परेशानी साफ थी। उसने हिम्मत करके कॉल किया। सफेद सूट वाले की हंसी अब फेक लगने लगी। नकली का २५०, असली का खेल इमोशंस को अच्छे से दिखाता है। भूरे सूट वाले बुजुर्ग की आंखों में हैरानी थी। यह सिर्फ बिजनेस नहीं पर्सनल भी है। स्टोरी में गहराई है। एक्टिंग ने जान डाल दी। दिलचस्प लग रहा है।

बेस्ट शॉर्ट ड्रामा

नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीरीज देखना एक्सपीरियंस रहा। हर सीन में कुछ नया है। पेटेंट लॉन्च बस बहाना था असली लड़ाई के लिए। नकली का २५०, असली का खेल बेस्ट शॉर्ट ड्रामा है। एडिटिंग फास्ट पेस्ड थी पर समझ आ गया। क्लाइमेक्स के पास पहुंच रहे हैं शायद। पात्रों की लेयरिंग अच्छी है। मजा आ गया देख कर। फिर से देखेंगे।