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ब्लाइंड डेट से दिल तकवां12एपिसोड

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ब्लाइंड डेट से दिल तक

पूर्व सैनिक सूरज सिंह, सीईओ जोया शेट्टी का नकली प्रेमी बनता है ताकि वह विक्रम राठौर के शादी के दबाव से बच सके। सूरज ने जोया के पिता की बीमारी ठीक की, जो उसके गुरु भाई की मौत से जुड़ी थी। विक्रम ने हत्यारे भेजे और बिजनेस में नुकसान पहुँचाया, लेकिन सूरज ने सब हराया। आखिर में सूरज को पता चला कि असली दुश्मन शर्मा परिवार है, और अब उसके सामने बदला और हिफाजत दोनों हैं।
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इस एपिसोड की समीक्षा

चाय का प्याला और तूफानी माहौल

इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस लेना भी मुश्किल लग रहा है। भूरे जैकेट वाला शख्स जब चाय पीता है, तो लगता है जैसे वह किसी बड़े फैसले की दहलीज पर खड़ा हो। लाल जैकेट वाले का गुस्सा और चश्मे वाले का हैरान चेहरा कहानी को नए मोड़ पर ले जा रहा है। ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे ड्रामेटिक मोड़ देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हर एक्टर ने अपने किरदार को बखूबी निभाया है, खासकर वो पल जब सबकी नजरें उस एक कप पर टिकी थीं।

मेज के इर्द-गिर्द छिपा युद्ध

खाने की मेज अक्सर प्यार की जगह होती है, लेकिन यहाँ तो ये युद्ध का मैदान बन गई है। लाल सूट वाला शख्स अपनी अकड़ दिखा रहा है, जबकि भूरे कोट वाली लड़की शांत लेकिन मजबूत लग रही है। पिस्ता खाने का वो छोटा सा एक्शन भी किसी बड़े इशारे से कम नहीं लग रहा। ब्लाइंड डेट से दिल तक की ये सीन बताती है कि कैसे छोटी-छोटी हरकतें बड़े झगड़ों की वजह बन सकती हैं। माहौल में बिजली सी दौड़ रही है और दर्शक के रूप में हम बस तमाशबीन बने हुए हैं।

गुस्से का असली रंग

लाल जैकेट वाले का गुस्सा साफ दिख रहा है, उसकी आँखों में नफरत और हाथों में बेचैनी है। चश्मे वाला शख्स बीच में आकर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है, लेकिन लगता है अब बहुत देर हो चुकी है। ब्लाइंड डेट से दिल तक में रिश्तों की ये नाजुक डोर कब टूट जाए, कोई नहीं जानता। जब वो फोन टेबल पर पटकता है, तो लगता है जैसे धमाका हो गया हो। ऐसे सीन देखकर लगता है कि इंसान का सब्र कितनी जल्दी जवाब दे सकता है।

खामोशी का शोर

कभी-कभी शोर से ज्यादा डरावनी खामोशी होती है। इस सीन में जब सब चुप हैं, तो हवा में तनाव साफ महसूस हो रहा है। भूरे जैकेट वाला शख्स अपनी दुनिया में खोया हुआ है, जबकि लड़की बस सब कुछ देख रही है। ब्लाइंड डेट से दिल तक की ये खामोशी दर्शकों को बांधे रखती है। हर चेहरे पर अलग-अलग कहानी लिखी है, कोई गुस्से में है तो कोई डरा हुआ है। ये वो पल है जब शब्दों की जरूरत नहीं होती, बस आँखें सब कुछ बयां कर देती हैं।

रिश्तों की कसौटी

दोस्तों और दुश्मनों के बीच की लकीर कितनी पतली होती है, ये सीन उसी को बयां करता है। लाल जैकेट वाला शख्स अपनी ताकत दिखा रहा है, लेकिन अंदर से वो कितना कमजोर है, ये उसकी हरकतों से साफ है। ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे मोड़ आते हैं जो दिल को छू लेते हैं। जब वो पिस्ता की तरफ इशारा करता है, तो लगता है जैसे वो किसी पुरानी याद को ताजा कर रहा हो। ये सिर्फ एक डिनर नहीं, बल्कि रिश्तों की परीक्षा है।

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