शुरुआत में ही पुरुष के हाथ पर पट्टी देखकर दिल दहल गया। वह चुपचाप बैठा है, लेकिन उसकी आँखों में एक गहरा दर्द छिपा है। महिला उसके पास बैठकर बात कर रही है, लेकिन लगता है जैसे दोनों के बीच कोई अनकही दीवार खड़ी हो। ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे दृश्य दर्शकों को भावनात्मक रूप से बांधे रखते हैं। कमरे का सजावट भव्य है, लेकिन माहौल में तनाव साफ झलकता है।
जब महिला नीली ड्रेस में ऑफिस में घुसी, तो लगा कुछ गड़बड़ होने वाली है। वह फाइल लेकर गई, लेकिन मालिक की नज़रें कुछ और ही देख रही थीं। उसने उसे अपनी गोद में बिठा लिया, और फिर जो हुआ वह सबके सामने आ गया। ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे दृश्य दिखाते हैं कि कैसे पावर का गलत इस्तेमाल होता है। यह दृश्य देखकर गुस्सा आता है, लेकिन साथ ही हैरानी भी होती है।
जब तीन लोग ऑफिस के गलियारे में चलते हुए आए, तो लगा जैसे कोई तूफान आने वाला हो। बीच में चलने वाली महिला की आँखों में गुस्सा था, पीछे वाली महिला फाइलें थामे हुए थी, और पुरुष लॉलीपॉप चूसते हुए भी गंभीर लग रहा था। ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे एंट्री दृश्य बहुत प्रभावशाली होते हैं। उनकी चाल में एक निश्चित उद्देश्य था, जो दर्शकों को उत्सुक कर देता है।
पुरुष के हाथ पर पट्टी और खरोंचें देखकर सवाल उठते हैं कि आखिर हुआ क्या था? क्या वह किसी झगड़े में फंस गया था? या फिर यह कोई दुर्घटना थी? महिला उसके पास बैठकर बात कर रही है, लेकिन उसकी आवाज़ में चिंता साफ झलकती है। ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे छोटे-छोटे विवरण कहानी को गहराई देते हैं। यह दृश्य दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है।
मालिक की हरकतें देखकर घृणा होती है। उसने महिला को अपनी गोद में बिठाकर उसकी गरदन को छूना शुरू कर दिया। महिला मुस्कुरा रही थी, लेकिन उसकी आँखों में डर साफ झलकता था। ब्लाइंड डेट से दिल तक में ऐसे दृश्य दिखाते हैं कि कैसे कुछ लोग अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करते हैं। यह दृश्य देखकर गुस्सा आता है, लेकिन साथ ही हैरानी भी होती है।