रिसेप्शन पर वो काले चमड़े का कोट पहने लड़की और गुलाबी शर्ट वाली के बीच की ठंडी जंग देखते ही बन रही थी। दोनों की आँखों में नफरत साफ झलक रही थी। जब वो कमरे के बाहर खड़ी थीं, तो लगा कोई बड़ा राज खुलने वाला है। इस शो बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में हर पल नया मोड़ ले रहा है। डायलॉग कम लेकिन एक्सप्रेशन बहुत कुछ कह रहे थे। दर्शक बंधे रहेंगे।
बिस्तर के पास घुटने टेककर बैठे उस शख्स की आँखों में जो बेचैनी थी, वो किसी डायलॉग से ज्यादा असरदार थी। वो जख्मी मरीज के लिए क्या महसूस कर रहा था, ये पता नहीं पर उसका जाना और वो दोनों लड़कियों का बाहर खड़ा होना सब कुछ बदल गया। कहानी में गहराई है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन जैसे सीन दिल को छू लेते हैं। सबको पसंद आएंगे।
गुलाबी शर्ट और काले जैकेट वाली लड़की के हाथ पर पट्टी थी, फिर भी उसने उस बेचारी पर हाथ उठा दिया। बिस्तर से घसीटकर नीचे गिराना कोई मजाक नहीं था। उसकी आँखों में बदले की आग साफ दिख रही थी। इंटरनेट मंच पर ऐसे सीन देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की कहानी में ये ट्विस्ट बहुत भारी था। सब हैरान रह गए।
सिर पर पट्टी बांधे वो मरीज जब बिस्तर से गिरी, तो उसकी चीख सुनकर रूह कांप गई। वो किसी की मदद मांग रही थी पर सामने खड़ी दुश्मन को कोई फर्क नहीं पड़ा। ये दृश्य बहुत दर्दनाक था। अस्पताल के कमरे नंबर आठ सौ दो में जो हुआ, वो आसान नहीं था। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में इमोशनल लेवल बहुत हाई है। देखने वाला दंग रह जाता है।
जब वो सूट वाला शख्स कमरे से बाहर निकला और दोनों लड़कियों को देखा, तो माहौल में बिजली कड़क गई। कोई कुछ बोला नहीं पर सब कुछ साफ था। वो चला गया और झगड़ा शुरू हो गया। ये खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की एक्टिंग बहुत स्वाभाविक लग रही थी। हर कोई अपनी भूमिका में सच है।
काले चमड़े का कोट पहने लड़की बहुत शांत लग रही थी, पर उसकी आँखें सब देख रही थीं। वो सुनहरे बालों वाली के साथ थी पर उसने हमला नहीं किया। शायद वो प्लान कर रही थी। इस शो में हर किरदार के अपने मकसद हैं। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में किरदारों की लेयरिंग बहुत अच्छी है। कहानी आगे बढ़ेगी तो मजा आएगा।
हाथ में पट्टी होने के बावजूद उसने हमला किया, इसका मतलब गुस्सा चोट से ज्यादा था। उसने उस जख्मी मरीज को बिल्कुल नहीं बख्शा। ये बदले की कहानी कहां तक जाएगी, ये देखना दिलचस्प होगा। वेब श्रृंखला पर ऐसे ड्रामे कम ही मिलते हैं। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन का ये भाग यादगार बन गया। सबको देखना चाहिए।
वो सूट वाला शख्स किसका साथ दे रहा था, ये अभी साफ नहीं है। वो चला गया तो लगता है वो इस झगड़े से दूर रहना चाहता था। पर दोनों लड़कियों का उस मरीज से क्या रिश्ता है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में रिश्तों की ये उलझन देखने लायक है। हर कोई किसी से नफरत कर रहा है। राज खुलने का इंतजार है।
इस कमरे के अंदर जो हुआ वो बाहर खड़ी लोगों को पता था। दरवाजे के शीशे में वो दोनों झांक रही थीं। ये जासूसी या दुश्मनी कुछ भी हो सकती है। माहौल बहुत रोमांचक था। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की कहानी बहुत तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अगला भाग कब आएगा। दर्शक बेसब्री से देखेंगे।
आखिर में जब वो मरीज जमीन पर गिरी और दर्द से कराहने लगी, तो स्क्रीन देखने वाले का दिल बैठ गया। इतनी बेरहमी किसी दुश्मन से भी नहीं होनी चाहिए। ये शो सिर्फ ड्रामा नहीं, इमोशन भी है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में ऐसे सीन दर्शकों को बांधे रखते हैं। बहुत ही शानदार प्रस्तुति। अगला भाग देखने को बेताब हैं।