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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मनवां8एपिसोड

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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन

बृंदा वर्मा, एक अमीर खानदान की असली ताकत, अपने बूढ़े कुत्ते शेरू के साथ क्रूज पर चढ़ती है ताकि अपने बेटे कमल की मंगेतर आलिया से मिल सके। पहचान की एक छोटी सी गलती क्रूरता, लालच और बढ़ते जुल्म को जन्म देती है। जैसे-जैसे झूठ बढ़ते हैं और समुद्र में हिंसा फैलती है, सच्चाई करीब आती जाती है, किनारे पर पहुँचने से पहले ही सब कुछ तोड़ने की धमकी देते हुए।
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इस एपिसोड की समीक्षा

एलिस का क्रूर व्यवहार

एलिस का व्यवहार देखकर बहुत गुस्सा आ रहा है। उसने औरत को जमीन पर खाना खिलाया। यह दृश्य बहुत तीव्र था। इस नाटक 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' में ताकत का गलत इस्तेमाल अच्छे दिखाया गया है। डेजी भी कम नहीं है, सब कुछ रिकॉर्ड कर रही थी। यह बहुत निंदनीय हरकत थी।

बेचारी औरत की हालत

बेचारी औरत कितना रो रही थी। उसके चेहरे पर चोट के निशान थे। केन से फोन पर बात हुई पर मदद नहीं मिली। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' की कहानी में यह मोड़ अचानक आया। खाना जमीन पर गिराकर खिलाना बहुत बुरा लगा। किसी को भी यह पसंद नहीं आएगा।

कुत्ते का इस्तेमाल

शुरु में कुत्ते को लेकर धमकी दी गई। जानवर को नुकसान नहीं पहुंचा पर डराया गया। एलिस ने लकड़ी का डंडा पकड़ा था पहले। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' में भावनात्मक दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं। पीड़ित की बेबसी साफ दिख रही थी स्क्रीन पर।

डेजी का रिकॉर्डिंग

डेजी ने फोन निकाला और रिकॉर्ड करने लगी। उसने एलिस का साथ दिया। दोनों यूनिफॉर्म में थी पर इंसानियत भूल गई। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' का यह पार्ट दिल तोड़ने वाला था। खाने का बर्बादी और औरत की बेइज्जती दोनों सदमे ने दिए।

केन का फोन कॉल

केन का कॉल आया पर उसने कुछ नहीं किया। एलिस ने फोन उठाया और बात की। पीड़ित बस देखती रही। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' में रहस्य बना हुआ है कि केन कौन है। यह दृश्य बहुत ही नाटकीय था और देखने लायक है। लोगों को यह पसंद आएगा।

जमीन पर खाना

जमीन पर गिरा हुआ खाना खिलाना बहुत अपमानजनक था। औरत के चेहरे पर मैला लग गया। एलिस ने दस्ताने पहने थे, साफ सफाई का ध्यान पर इंसानियत नहीं। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' की अभिनय बहुत जबरदस्त है। यह दृश्य भूलना मुश्किल है।

कैमरा और रोशनी

रोशनी और कैमरा कोनों ने तनाव बढ़ा दिया। करीब के शॉट्स में आंसू साफ दिख रहे थे। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' की बनावट अच्छी है। एलिस की मुस्कान देखकर गुस्सा आता है। डेजी भी उसके साथ हंसी खुशी थी। तकनीकी पक्ष भी मजबूत है।

ताकत का दुरुपयोग

यूनिफॉर्म वाली औरतें अधिकार का गलत इस्तेमाल कर रही थीं। पीड़ित के पास कोई चारा नहीं था। उसने खाना उठाया और खाया मजबूरी में। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' में यह दिखाता है कि कैसे लोग दूसरों को तोड़ते हैं। बहुत गंभीर दृश्य था।

भावनात्मक झटका

देखकर रोंगटे खड़े हो गए। औरत की चीख सुनकर दुख हुआ। एलिस ने उसके बाल पकड़े और खाने में धक्का दिया। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' ने सच में भावनात्मक कर दिया। ऐसे दृश्य असली जीवन की कड़वी सचाई दिखाते हैं। दर्शकों को झकझोर देता है।

कहानी का मोड़

कहानी में क्या चल रहा है समझ नहीं आ रहा पर दृश्य प्रभावशाली था। एलिस और डेजी की दोस्ती अजीब है। पीड़ित की हालत खराब थी। 'बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन' का यह भाग बहुत यादगार बन गया। आगे क्या होगा जानने की उत्सुकता है। अगला भाग देखने का मन है।