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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मनवां5एपिसोड

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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन

बृंदा वर्मा, एक अमीर खानदान की असली ताकत, अपने बूढ़े कुत्ते शेरू के साथ क्रूज पर चढ़ती है ताकि अपने बेटे कमल की मंगेतर आलिया से मिल सके। पहचान की एक छोटी सी गलती क्रूरता, लालच और बढ़ते जुल्म को जन्म देती है। जैसे-जैसे झूठ बढ़ते हैं और समुद्र में हिंसा फैलती है, सच्चाई करीब आती जाती है, किनारे पर पहुँचने से पहले ही सब कुछ तोड़ने की धमकी देते हुए।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बदले की आग

एलिस का व्यवहार देखकर बहुत गुस्सा आ रहा है। बेचारी लड़की पर खाना गिराकर उसे नीचे गिरा दिया गया। ऐसा लगता है कि उसे अपनी ताकत का बहुत घमंड है। लेकिन जब फोन की तस्वीर सामने आई तो सब हैरान रह गए। यह कहानी बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन जैसी जटिल है। कोई नहीं जानता था कि वह इतनी महत्वपूर्ण है। अब एलिस की बोलती बंद हो गई है। सच सामने आने में देर नहीं लगती। देखना होगा अब क्या होता है। यह दृश्य बहुत गहरा असर छोड़ता है।

फोन का राज़

जब डेज़ी ने वह मोबाइल उठाया तो सबकी सांसें रुक गईं। पर्दे पर वही आदमी था जिसके दफ्तर में हमने पहले देखा था। एलिस के चेहरे का रंग उतर गया। उसे समझ आ गया कि उसने गलत इंसान को तंग किया है। इस नाटक बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में हर मोड़ पर नया सच सामने आता है। अब देखना यह है कि वह लड़की क्या करती है। क्या वह माफ़ करेगी या बदला लेगी। सबकी नज़रें अब उसी पर हैं। यह पल बहुत अहम है।

पानी में धक्का

उस बर्तन में पानी के अंदर धक्का देना बहुत क्रूर था। लड़की तड़प रही थी लेकिन कोई मदद को नहीं आया। एलिस और डेज़ी बस देखती रहीं। यह दृश्य दिल को झकझोर देता है। कहानी बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन के नाम से ही लगता है कि रिश्तों में कड़वाहट है। शायद यह लड़की उस आदमी के परिवार से जुड़ी है। वरना इतनी बेइज्जती क्यों। बहुत गहरा षड्यंत्र लग रहा है। जानना बाकी है। सब हैरान हैं।

दफ्तर की भूमिका

दफ्तर वाला दृश्य बहुत अलग था। एंड्र्यू वहां खड़ा था और वह आदमी कागजात पर दस्तखत कर रहा था। लगता है वह कंपनी का मालिक है। उसे नहीं पता कि उसकी जानने वाली लड़की के साथ क्या हो रहा है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में ऐसे ही छुपे हुए रिश्ते कहानी को आगे बढ़ाते हैं। जब उसे पता चलेगा तो वह क्या करेगा। यह इंतज़ार देखने लायक होगा। बहुत उत्सुकता है। कब पता चलेगा।

एलिस का घमंड

एलिस को लगता है कि वह सब कुछ काबू कर सकती है। उसने दस्ताने पहने हुए हैं और खुद को साफ़ सुथरा रखती है। लेकिन उसकी हरकतें गंदी हैं। जब सच सामने आया तो वह स्तब्ध रह गई। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन जैसे शो में अक्सर घमंडी इंसान को सबक मिलता है। उम्मीद है इस लड़की को न्याय मिलेगा। उसकी आंखों में आंसू देखकर बुरा लगा। बहुत दुख हुआ। कोई सहारा नहीं था।

डेज़ी की चुप्पी

डेज़ी बस चुपचाप सब देख रही थी। कभी कभी वह मुस्कुरा भी रही थी। क्या वह भी एलिस के साथ मिली हुई है। यह दोस्ती झूठी लगती है। जब फोन का राज़ खुला तो वह भी चौंक गई। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में दोस्त ही दुश्मन बन जाते हैं। अब वह किसका साथ देगी। यह कहानी बहुत पेचीदा होती जा रही है। हर किरदार के अपने मकसद हैं। समझना मुश्किल है। कौन सच्चा है।

सच का सामना

आखिरकार सच सामने आ ही गया। उस मोबाइल की तस्वीर ने सब बदल दिया। एलिस अब डरी हुई लग रही है। उसे अपनी गलती का अहसास हो गया है। लेकिन बहुत देर हो चुकी है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में ऐसे ही पल आते हैं जब कायर सामने आते हैं। उस लड़की की हिम्मत देखकर दाद मिलती है। उसने हार नहीं मानी। अब पलटवार का समय है। देखते हैं। क्या होगा।

वर्दी वाला अहंकार

वर्दी पहनकर उन्हें लगता है कि वे ऊंचे हैं। लेकिन इंसानियत से बड़ी कोई वर्दी नहीं होती। उन्होंने उस बेचारी को जमीन पर गिराया। खाना उसके चेहरे पर था। यह दृश्य बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की कहानी को और गहरा करता है। शायद वह लड़की अमीर घर की बहू बनने वाली है। इसलिए यह दुश्मनी है। बहुत रोमांचक लग रहा है। आगे क्या होगा। सब देख रहे हैं।

आंसू और बदला

लड़की की आंखों में आंसू थे लेकिन उसमें गुस्सा भी था। वह चुप नहीं बैठने वाली। एलिस को अब डर लग रहा है। उसने जो बोया है वह काटने को दौड़ेगा। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में बदले की आग बहुत तेज जलती है। यह सिर्फ एक नौकरी का मामला नहीं है। यह निजी दुश्मनी लगती है। कौन है यह लड़की असल में। सब जानना चाहते हैं। बहुत सवाल हैं। जवाब चाहिए।

कहानी का मोड़

शुरू में लगा कि यह सिर्फ प्रताड़ना है। लेकिन अंत में पता चला कि यह कुछ और ही है। उस आदमी और लड़की का रिश्ता क्या है। एलिस की हैरानी देखने लायक थी। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन जैसे नाम से सब साफ़ हो जाता है। परिवार के रिश्ते उलझ गए हैं। अब आगे क्या होगा यह देखना बाकी है। बहुत रहस्य बना हुआ है। मज़ा आ रहा है। कब आएगा अंत।