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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मनवां33एपिसोड

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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन

बृंदा वर्मा, एक अमीर खानदान की असली ताकत, अपने बूढ़े कुत्ते शेरू के साथ क्रूज पर चढ़ती है ताकि अपने बेटे कमल की मंगेतर आलिया से मिल सके। पहचान की एक छोटी सी गलती क्रूरता, लालच और बढ़ते जुल्म को जन्म देती है। जैसे-जैसे झूठ बढ़ते हैं और समुद्र में हिंसा फैलती है, सच्चाई करीब आती जाती है, किनारे पर पहुँचने से पहले ही सब कुछ तोड़ने की धमकी देते हुए।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अस्पताल का रहस्य

इस ड्रामे में अस्पताल का माहौल बहुत तनावपूर्ण है। जब घायल महिला जमीन पर बेहोश पड़ी थी और गोलियां बिखरी थीं, तो लगा कि कुछ गड़बड़ जरूर हुई है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन कहानी में यह मोड़ बहुत चौंकाने वाला था। नर्स का चेहरा देखकर लग रहा था कि वह कुछ छिपा रही है। दर्शक के रूप में मैं इस रहस्य को सुलझाने के लिए बेचैन हूं कि आखिर हुआ क्या था।

सूट वाले शख्स की चिंता

जब वह सूट पहने शख्स दौड़ता हुआ कमरे में आया, तो उसकी आंखों में साफ डर दिखाई दिया। उसने बिस्तर पर लेटी महिला का हाथ थामा और उसकी बेचैनी साफ झलक रही थी। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन सीरीज में ऐसे इमोशनल सीन दिल को छू लेते हैं। डॉक्टर की बात सुनकर उसका गुस्सा और चिंता बढ़ गई। अभिनेता ने अपने रोल को बहुत अच्छे से निभाया है।

दो महिलाओं का टकराव

काले कोट वाली और गुलाबी शर्ट वाली महिला के बीच की खामोशी बहुत कुछ कह रही थी। दोनों के चेहरे पर अलग-अलग भाव थे, एक पर चिंता तो दूसरे पर अजीब सी शांति। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन प्लॉट में यह दुश्मनी साफ झलकती है। ऐसा लग रहा है कि इन दोनों के बीच कुछ पुरानी दुश्मनी चल रही है जो इस हादसे की वजह बनी हो सकती है।

डॉक्टर का रवैया

डॉक्टर साहब का व्यवहार बहुत गंभीर था। उन्होंने मरीज की हालत देखकर जो जानकारी दी, उससे कमरे का माहौल और भी भारी हो गया। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन कहानी में मेडिकल स्टाफ का रोल भी अहम लग रहा है। सफेद कोट में नर्स भी चुपचाप सब देख रही थी। लगता है इस अस्पताल की दीवारें भी कुछ राज जानती हैं जो अभी सामने नहीं आए हैं।

बिखरी गोलियां और सबूत

जमीन पर बिखरी रंगीन गोलियां किसी दुर्घटना का संकेत दे रही थीं। घायल महिला के सिर पर पट्टी और खून के निशान देखकर दिल दहल गया। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन सीन में यह सबूत बहुत अहम साबित हो सकते हैं। शायद किसी ने जानबूझकर यह किया हो। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीन देखते वक्त मैं सांस रोके देख रही थी कि आगे क्या होता है।

रिश्तों की उलझन

इस कहानी में रिश्तों की उलझन बहुत गहरी लग रही है। जब वह शख्स महिला के पास बैठा, तो लगा कि वह सिर्फ एक दोस्त नहीं बल्कि कुछ खास है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन टाइटल से साफ है कि परिवारिक कलह इसकी जड़ में है। हर किरदार के चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी हुई है। दर्शक को हर पल नया संदेह होता है कि सच्चाई क्या है।

सुनहरे बालों वाली का राज

ब्लॉन्ड हेयर वाली महिला के हाथ पर पट्टी थी और हाथ में एक बोतल थी। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी जो शक पैदा करती है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन प्लॉट में वह किसी साजिश का हिस्सा लग रही है। उसने जब पीछे मुड़कर देखा, तो लगा वह कुछ छिपा रही है। इस किरदार की पर्सनालिटी बहुत रहस्यमयी बनाई गई है।

बेचैन करने वाला माहौल

अस्पताल के कमरे की लाइटिंग और सन्नाटा बहुत बेचैन करने वाला था। हर कोई इंतजार कर रहा था कि मरीज कब होश में आए। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन सीरीज का यह एपिसोड बहुत तेज रफ्तार है। सूट वाले शख्स की घबराहट देखकर लगता है कि वक्त बहुत कम है। ऐसे थ्रिलर सीन देखने का मजा ही अलग है जब हर पल संदेह बना रहे।

नर्स की चुप्पी

नर्स ने जब दरवाजे पर खड़े होकर सब देखा, तो उसने कुछ कहा नहीं। उसकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन कहानी में छोटे किरदार भी बड़े राज जानते हैं। शायद उसने कुछ देखा हो जो उसने डॉक्टर को नहीं बताया। यह छोटा सा डिटेिल कहानी को और भी दिलचस्प बना देता है और दर्शक को जोड़े रखता है।

नेटशॉर्ट पर बेहतरीन अनुभव

इस शो को नेटशॉर्ट ऐप पर देखना बहुत रोमांचक रहा। कहानी की पकड़ इतनी मजबूत है कि एक एपिसोड खत्म होते ही दूसरा देखने का मन करता है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन जैसे ड्रामे कम ही देखने को मिलते हैं। एक्टिंग से लेकर सेट डिजाइन तक सब कुछ असली लगता है। मैं सबको सलाह दूंगी कि इसे जरूर देखें।