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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मनवां37एपिसोड

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बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन

बृंदा वर्मा, एक अमीर खानदान की असली ताकत, अपने बूढ़े कुत्ते शेरू के साथ क्रूज पर चढ़ती है ताकि अपने बेटे कमल की मंगेतर आलिया से मिल सके। पहचान की एक छोटी सी गलती क्रूरता, लालच और बढ़ते जुल्म को जन्म देती है। जैसे-जैसे झूठ बढ़ते हैं और समुद्र में हिंसा फैलती है, सच्चाई करीब आती जाती है, किनारे पर पहुँचने से पहले ही सब कुछ तोड़ने की धमकी देते हुए।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सफेद सूट का राज

सफेद सूट वाले की आँखों में गुस्सा और प्यार दोनों साफ दिख रहा है। जब उसने सुनहरे बालों वाली का हाथ पकड़ा, तो माहौल में बिजली सी कौंध गई। यह कहानी कितनी उलझी हुई है, यह देखकर हैरानी होती है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में ऐसे मोड़ उम्मीद से ज्यादा हैं। हर कोई किसी राज को छिपा रहा है। यहाँ तक कि सबसे करीबी लोग भी एक दूसरे से दूर लग रहे हैं। इस नाटक में हर पल नया होता है।

सुनहरे बालों का दर्द

सुनहरे हेडपीस वाली की मुस्कान के पीछे का दर्द कोई नहीं समझ पा रहा। सफेद जैकेट वाले शख्स के साथ उनकी नजदीकियां बढ़ रही हैं, लेकिन हल्के गुलाबी पोशाक वाली की चिंता साफ झलक रही है। क्या यह कोई साजिश है? बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन का हर प्रसंग नया सवाल खड़ा करता है। देखते रहना पड़ता है। लोग क्या सोच रहे हैं, यह जानना मुश्किल है।

काले सूट की चाल

काले सूट वाले व्यक्ति की बातों में कुछ चालाकी लग रही थी। सफेद सूट वाले ने जब उसे डांटा, तो लगा जैसे कोई पुरानी दुश्मनी सामने आ गई हो। पार्टी का माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में रिश्तों की यह जंग देखने लायक है। कौन जीतेगा, कौन हारेगा, कुछ नहीं कहा जा सकता। सबके चेहरे पर नकाब है।

अनोखी पोशाक का सच

सुनहरे बालों वाली की पोशाक बहुत अनोखी है, लेकिन उनकी आँखों में एक अजीब सी उदासी है। सफेद सूट वाले शख्स का उन पर हक जताना साफ दिख रहा है। शायद यह प्यार नहीं, कोई सौदा है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की कहानी में ऐसे कई राज दबे हैं। दर्शक बस देखते रह जाते हैं। सच्चाई कब सामने आएगी, कोई नहीं जानता।

तिकोना प्यार और दर्द

हल्के गुलाबी रंग की पोशाक वाली को लग रहा है कि सब कुछ उसके हाथ से निकल रहा है। उसकी नज़रें सफेद सूट वाले पर टिकी हैं, पर वह किसी और की तरफ देख रहा है। यह तिकोना प्यार कितना दर्दनाक हो सकता है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में भावनाओं का यह खेल बहुत गहरा है। दिल पर चोट लगती है। कोई किसी का नहीं है यहाँ।

भीड़ में करीबियां

जब सफेद सूट वाले ने सुनहरे बालों वाली को करीब बुलाया, तो सबकी सांसें रुक गईं। इतनी भीड़ में भी इन दोनों के बीच की दूरी खत्म होती दिखी। क्या यह सच है या कोई नाटक? बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में हर पल संदेह बना रहता है। सच्चाई सामने आएगी तो हड़कंप मच जाएगा। सब हैरान रह जाएंगे।

अमीराना माहौल का सच

पार्टी का माहौल बहुत अमीराना है, लेकिन चेहरों पर नकाब जैसे भाव हैं। काले सूट वाले की बातों में जहर घुला हुआ लग रहा था। सफेद सूट वाले ने अपनी गरिमा बनाए रखी। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में अमीरी और गरीबी नहीं, दिलों की लड़ाई है। कौन असली है, यह जानना जरूरी है। पैसा सब कुछ नहीं होता।

मुस्कान के पीछे आंसू

सुनहरे बालों वाली की आँखों में आंसू छिपे हैं, मुस्कान के पीछे। सफेद सूट वाले का गुस्सा उनके लिए है या किसी और के लिए? यह उलझन बनी हुई है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन की कथा में ऐसे मोड़ बार-बार आते हैं। दर्शक हैरान रह जाते हैं। क्या अंत खुशहाल होगा? सब इंतजार कर रहे हैं।

हावी होने वाला प्यार

सफेद सूट वाले के शारीरिक हावभाव बहुत हावी होने वाले हैं। उसने जब हाथ थामा, तो लगा जैसे वह किसी को छोड़ना नहीं चाहता। सुनहरे बालों वाली भी चुपचाप सब सहन कर रही है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में प्यार और पागलपन की सीमा मिट गई है। यह रिश्ता कैसे निभेगा, देखना बाकी है। बहुत उलझन है।

चुप्पी का शोर

हल्के गुलाबी पोशाक वाली की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। वह सब देख रही है पर कुछ कह नहीं पा रही। सफेद सूट वाले और सुनहरे बालों वाली के बीच का लगाव अलग है। बेटे की मंगेतर, माँ की दुश्मन में हर किरदार का अपना दर्द है। कहानी बहुत गहरी होती जा रही है। अंत क्या होगा?