इस दृश्य में जो भावनात्मक तनाव है वह वाकई दिल को छू लेता है। जब वे एक-दूसरे को गले लगाते हैं, तो लगता है जैसे सालों की दूरियां मिट रही हों, लेकिन अचानक अलग होते ही चेहरों पर जो ठंडक आ जाती है, वह सब कुछ बदल देती है। सॉरी मिस्टर खन्ना, बच्चा तुम्हारा नहीं जैसे मोड़ की झलक इसी खामोशी में छिपी लगती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखना एक अलग ही अनुभव है, जहां हर नज़ारा कहानी कहता है।