ऑफिस में बैठा शख्स घड़ी देखकर बेचैन है, फिर फोन उठाता है। दूसरी तरफ दो दोस्त रात के बाहर खड़े हैं, एक की आंखों में आंसू, दूसरी की मुस्कान में छिपा दर्द। जब फोन की घंटी बजती है, तो लगता है जैसे सॉरी मिस्टर खन्ना, बच्चा तुम्हारा नहीं का कोई पुराना राज खुलने वाला हो। हर नजर, हर सांस में तनाव है — क्या ये बातचीत रिश्तों को तोड़ देगी या जोड़ देगी?