शुरुआत ही इतनी तीव्र थी कि सांस रुक गई। कोट पहने उस आदमी की आँखों में डर साफ़ दिख रहा था जब वो ज़मीन पर बैठा था। जब वो गार्ड छुरी लेकर आगे बढ़ा तब लगा अब तो गया काम से। मेन आखरी सैवियर हूँ में ऐसे मोड़ मिलना आम बात है पर ये दृश्य अलग ही स्तर का था। हेलीकॉप्टर की आवाज़ ने माहौल को और भी गंभीर कर दिया और दर्शकों को बांध कर रखा।
जब हेलीकॉप्टर से सैनिक उतरे तब लगा अब बचाव हो जाएगा पर कहानी में कुछ और ही चल रहा था। हरी वर्दी वाले कमांडर ने जब पिस्तौल निकाली तब सबकी हवा निकल गई। ये दिखाता है कि यहाँ कोई भी भरोसेमंद नहीं है और हर पल खतरा बना रहता है। एक्शन दृश्यों की गुणवत्ता देख कर लगता है निर्माण पर कोई कसर नहीं छोड़ी गई है और सब कुछ उत्कृष्ट है।
वो चाकू वाला गार्ड कितना खतरनाक लग रहा था उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था बस एक ठंडी मुस्कान थी जो डरावनी थी। कोट वाले ने जब पहचान पत्र दिखाई तब लगा शायद वो बच जाएगा पर कमांडो ने जो किया वो किसी ने सोचा नहीं था। मेन आखरी सैवियर हूँ की कहानी हमेशा अप्रत्याशित रहती है जो इसे देखने लायक बनाती है और हर बार नया लगता है।
दोनों महिला सैनिकों की प्रतिक्रिया देख कर लगा वो कुछ छुपा रही हैं क्योंकि उनकी आँखों में चिंता साफ़ दिख रही थी जब वो बात कर रही थीं। जब एक ने दूसरे को पकड़ा तब लगा शायद वो भी इस खेल का हिस्सा हैं और कुछ योजना बना रही हैं। पृष्ठभूमि में टूटे हुए शहर का नज़ारा कहानी की गंभीरता को बढ़ाता है और हर दृश्य में एक अलग ही तनाव है जो बनाये रखती है।
कमांडर ने जब अपने ही आदमी को बंदूक की नोक पर रखा तब सब चौंक गए क्योंकि ये धोका क्यों हुआ किसी को समझ नहीं आया। क्या कोट वाले ने सच कहा था या झूठ ये सवाल दिमाग में घूम रहे थे। नेटशॉर्ट ऐप पर ये श्रृंखला देखने का अनुभव काफी सहज रहा और ग्राफ़िक्स और आवाज़ का मिश्रण बिल्कुल सिनेमा जैसा लगता है जो पसंद आया।
शुरु में लगा ये सिर्फ एक बचाव मिशन है पर अंत तक पता चला ये तो एक साजिश थी जो पहले से योजना बनाई गई थी। गार्ड के वेस्ट पर लिखे नाम बदल रहे थे जो भ्रम बढ़ाता है पर कहानी मजबूत है। कोट वाले का अभिनय लाजवाब था जब वो पसीने से तर बतर था और डर रहा था। मेन आखरी सैवियर हूँ में ऐसे भावनात्मक पल बहुत हैं जो दिल को छू लेते हैं।
एक्शन अनुक्रम में जो गति थी वो कमाल की थी और हेलीकॉप्टर से उतरते सैनिकों का दृश्य एक्शन फिल्मों को टक्कर देता है बिल्कुल। हरे जैकेट वाले कमांडर की एंट्री धमाकेदार थी और उसने बिना कुछ बोले ही अपनी शक्ति दिखा दी सबको। अब देखना ये है कि आगे क्या होता है क्योंकि रोचक मोड़ ने नींद उड़ा दी है और इंतज़ार मुश्किल हो गया है।
जब कोट वाले ने कमांडो को रोका तब लगा शायद वो पुराने दोस्त हैं पर कमांडो ने बंदूक घुमा दी और सब हैरान रह गए। ये विश्वासघात दृश्य दिल को छू गया और भावनात्मक कर दिया। महिला टीम की चुप्पी भी कुछ कह रही थी और माहौल में जो धूल थी उसने दृश्य को और यथार्थवादी बना दिया। ऐसे सामग्री के लिए ही तो हम प्रतीक्षा करते हैं हर बार।
दृश्य इतने स्पष्ट हैं कि हर विवरण दिखती है साफ़ साफ़। गार्ड की चाकू से लेकर कमांडर की पिस्तौल तक सब कुछ स्पष्ट था और डिज़ाइन अच्छा था। कहानी में जो मोड़ आया वो मैंने नहीं सोचा था और आश्चर्य मिला। मेन आखरी सैवियर हूँ ने मेरी उम्मीदों को पार कर दिया है और अब अगले एपिसोड का इंतज़ार मुश्किल हो गया है सच में।
अंत में जब कमांडर ने बंदूक सीधी कर ली तब लगा अब गोली चलेगी और कुछ होगा। कोट वाले की हालत खराब थी पर उसने हिम्मत नहीं हारी और लड़ने की कोशिश की। ये श्रृंखला सिर्फ एक्शन नहीं बल्कि भावनाओं पर भी काम करती है और गहरी है। नेटशॉर्ट ऐप पर मिलने वाला ये सामग्री काफी अनोखा है और कहानी का हर मोड़ नया आश्चर्य लेकर आता है जो पसंद आया।
इस एपिसोड की समीक्षा
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