विक की कार्रवाई देख कर रोंगटे खड़े हो गए हैं। उसने कैसे अकेला सैनिक दल को रोका, वो आश्चर्यजनक था। लड़की के साथ भागते वक्त जो तनाव था, वो मैं आखरी सेवियर हूँ में कम ही देखा है। हरे टैंक वाला दृश्य तो हिलाने वाला था।
लड़की की आँखों में डर साफ़ दिख रहा था जब विक ने उसे बचाया। उनके बीच का लगाव बिना संवाद के समझ आ गया। मैं आखरी सेवियर हूँ की ये कड़ी जज़्बाती उतार चढ़ाव थी। लैब का रहस्य अब खुला है।
कॉरिडोर वाली पीछा में सांस रुक गई थी। हर कोने पे खतरा था। विक ने ग्रेनेड फेंका और दरवाज़ा तोड़ा, क्या दृश्य था! मैं आखरी सेवियर हूँ में ऐसे मोड़ मिलते हैं। राक्षस कौन हैं?
रोशनी और रेड अलर्ट का माहौल बहुत तनावपूर्ण था। सैनिकों के सामान से लेकर हरे टैंक तक, सब कुछ विस्तृत है। मैं आखरी सेवियर हूँ की निर्माण गुणवत्ता उत्तम लगती है। विक का रूप भी ज़बरदस्त था।
विक सिर्फ रक्षक नहीं, वो संरक्षक लग रहा था। उसने लड़की का हाथ नहीं छोड़ा मुश्किल वक्त में। मैं आखरी सेवियर हूँ में वीरता की नयी परिभाषा लिखी गई है। आगे क्या होगा?
शुरु से अंत तक एक पल के लिए भी नीरस नहीं लगा। गोलियां और भागने का क्रम पूर्णतः संपादित था। मैं आखरी सेवियर हूँ की गति बहुत तेज़ है। अब राक्षस कक्ष में क्या होगा?
वो हरे टैंक में क्या था? जीव इंसान जैसे लग रहे थे। विक और लड़की का प्रतिक्रिया देख कर लगा कुछ बड़ा होने वाला है। मैं आखरी सेवियर हूँ का कथा रोचक होता जा रहा है।
विक के चेहरे पर गुस्सा और दृढ़ संकल्प साफ़ था। लड़की की चीख सुन कर दिल दुखी हो गया। बिना ज़्यादा बोले कहानी कह दी मैं आखरी सेवियर हूँ ने। अभिनय ठोस थी। हर भाव में डर था।
जब दरवाज़ा टूटा और वो कक्ष दिखा, अद्भुत क्षण था। पूरा संस्थान किसके नियंत्रण में है? विक अब आगे क्या करेगा? मैं आखरी सेवियर हूँ का चरमोत्कर्ष मोड़ ज़बरदस्त था। रहस्य बढ़ता जा रहा है।
विज्ञान कल्पना और कार्रवाई का पूर्ण मिश्रण था ये कड़ी। सैनिक बनाम रक्षक वाली लड़ाई शानदार थी। मैं आखरी सेवियर हूँ देखने का मज़ा ही अलग है। अगला कड़ी कब आएगा? इंतज़ार मुश्किल है।
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