शुरुआत में ही माँ का गुस्सा देखकर लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। बेटा बेचारा बीच में फंस गया, उसकी आँखों में डर साफ दिख रहा था। गुमशुदा वारिस घर लौटी कहानी में यह तनाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। घर का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि साँस लेना मुश्किल हो रहा था। माँ की आवाज़ में जो अधिकार था, वह सच में डरावना था।
बाहर का दृश्य देखकर हैरानी हुई, लड़कियों का समूह एक लड़की को परेशान कर रहा था। यह दृश्य गुमशुदा वारिस घर लौटी के सबसे चौंकाने वाले हिस्सों में से एक था। लड़की की आँखों में दर्द और दूसरों के चेहरे पर मुस्कान, यह विरोधाभास दिल दहला देने वाला था। पानी से भरी बाल्टी और गंदगी, सब कुछ इतना वास्तविक लगा।
जब उस लड़की को ज़मीन पर गिराया गया, तो उसकी आँखों में आँसू देखकर दिल भर आया। गुमशुदा वारिस घर लौटी में ऐसे दृश्य दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं। उसकी चीखें और दूसरों की हँसी, यह दृश्य बहुत ही दर्दनाक था। उस लड़की की बेबसी देखकर लगता है कि वह अकेली पड़ गई है।
जब माँ बाहर आई और सब कुछ देखा, तो सबकी चुप्पी बहुत कुछ कह गई। गुमशुदा वारिस घर लौटी में यह दृश्य बहुत ही शक्तिशाली था। माँ के चेहरे पर गुस्सा और चिंता दोनों थे। लड़कियाँ डर गईं और उस लड़की की आँखों में उम्मीद जाग उठी। माँ का आना सब कुछ बदल सकता है।
लड़कियों का व्यवहार देखकर हैरानी हुई, वे एक दूसरे को इतना नीचा दिखा रही थीं। गुमशुदा वारिस घर लौटी में यह दृश्य समाज की कड़वी सच्चाई दिखाता है। उनकी हँसी और मज़ाक उड़ाना, सब कुछ इतना क्रूर लगा। उस लड़की की हालत देखकर लगता है कि वह टूट गई है।