इस दृश्य में तनाव इतना बढ़ गया कि सांस रुकने लगी। चीयरलीडर ने गुस्से में आकर कैंची उठा ली, जो कि बिल्कुल भी सही नहीं था। फुटबॉल खिलाड़ी नंबर १२ की प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि वह इस हिंसा से सहमत नहीं है। गुमशुदा वारिस घर लौटी जैसे ड्रामे में अक्सर ऐसे मोड़ आते हैं जहां दोस्ती टूट जाती है। स्कूल के मैदान पर यह झगड़ा बहुत गहरा असर छोड़ गया है।
सफेद रिबन वाली लड़की बेचारी कुछ समझ पाती उससे पहले ही चीयरलीडर ने हमला कर दिया। यह देखकर बहुत बुरा लगा कि कैसे एक छोटी सी बहस इतनी बड़ी मारपीट में बदल गई। फुटबॉल जर्सी वाला लड़का बीच में आया लेकिन देर हो चुकी थी। गुमशुदा वारिस घर लौटी की कहानियों में भी ऐसे ही भावनात्मक धोखे दिखाए जाते हैं। उम्मीद है कि वह लड़की ठीक हो जाएगी।
पूरे झगड़े के दौरान फुटबॉल खिलाड़ी नंबर १२ बस खड़ा देखता रहा, यह उसकी सबसे बड़ी गलती थी। शायद वह चीयरलीडर से डर रहा था या फिर उसे लगा कि यह लड़कियों का मामला है। लेकिन जब बात कैंची तक पहुंच गई, तो उसे रुकवाना चाहिए था। गुमशुदा वारिस घर लौटी में हीरो अक्सर ऐसे मोड़ पर सही फैसला लेता है, पर यहां वह चुप रहा। यह पात्र बहुत जटिल लग रहा है।
पीली और नीली वर्दी वाली चीयरलीडर का गुस्सा देखकर लगता है कि उसके पास कोई बहुत बड़ी वजह होगी। शायद उस लड़की ने उसका कोई राज़ जान लिया हो या फिर फुटबॉल खिलाड़ी को लेकर कोई गलतफहमी हो। गुमशुदा वारिस घर लौटी में भी ऐसे ही जलन के किस्से होते हैं। उसने कैंची से हमला करके अपनी सीमा पार कर दी, अब सबकी नजरें उस पर हैं।
स्टेडियम की सीढ़ियों पर हुआ यह झगड़ा किसी एक्शन मूवी से कम नहीं था। चीयरलीडर का हमला इतना तेज था कि सफेद शर्ट वाली लड़की संभल भी नहीं पाई। फुटबॉल खिलाड़ी नंबर १२ की आंखों में डर साफ दिख रहा था। गुमशुदा वारिस घर लौटी जैसे शो में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। यह सीन बहुत ही इंटेंस और यादगार बन गया है।