फुटबॉल मैच के बीच में यह ड्रामा किसी से कम नहीं है। डेज़ी का मेकअप खराब होना और फिर उस पर कॉफी गिरना, यह सब देखकर हैरानी होती है। गुमशुदा वारिस घर लौटी जैसी कहानियों में भी इतना ट्विस्ट नहीं होता जितना इस स्कूल के मैदान में हो रहा है। वेटर लड़की की गलती थी या जानबूझकर किया गया एक्शन, यह समझना मुश्किल है।
ब्लेज़र पहने लड़के और चीयरलीडर्स के बीच की नफरत साफ दिख रही है। जब वेटर लड़की ने गलती से कॉफी गिरा दी, तो माहौल एकदम तनावपूर्ण हो गया। गुमशुदा वारिस घर लौटी में भी परिवार के झगड़े ऐसे ही होते हैं। यहाँ क्लास डिफरेंस साफ झलकता है जब अमीर लड़कियां गरीब लड़की को नीचा दिखाती हैं।
अंत में जब लड़कियों ने वेटर के बाल काटने की धमकी दी, तो सबकी सांसें रुक गईं। यह एग्रेसिवनेस किसी हाई स्कूल मूवी से कम नहीं लगती। गुमशुदा वारिस घर लौटी के किरदार भी इतने खतरनाक नहीं थे। डेज़ी और एरिन का व्यवहार सच में चौंकाने वाला था, जो दिखाता है कि पॉपुलरिटी के नशे में लोग कितना गिर सकते हैं।
वह बेचारी लड़की जो ट्रे लेकर आई थी, उसका चेहरा देखकर तरस आ रहा था। उसने माफी मांगी लेकिन चीयरलीडर्स ने उसे छोड़ा नहीं। गुमशुदा वारिस घर लौटी में भी गलतफहमियां होती हैं, पर यहाँ तो सीधा बुलींग हो रहा है। उस लड़की की आंखों में डर साफ दिख रहा था जब उसने अपने बालों को पकड़ा।
फुटबॉल खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार था, खासकर नंबर १२ वाले ने। लेकिन असली खेल तो बेंच पर बैठे अमीर लड़कों और चीयरलीडर्स के बीच चल रहा था। गुमशुदा वारिस घर लौटी की तरह यहाँ भी पावर गेम चल रहा है। जब डेज़ी ने वेटर पर हमला बोला, तो लगा कि मैच से ज्यादा यह फाइट इंपोर्टेंट है।