लाल पोशाक वाली महिला का व्यवहार सच में चौंकाने वाला है। वह खुद को कितना ऊंचा समझती है! स्कूल के माहौल में इस तरह का घमंड देखकर गुस्सा आता है। गुमशुदा वारिस घर लौटी कहानी में यह किरदार सबसे ज्यादा नफरत करने लायक है। उसकी हरकतें देखकर लगता है कि पैसा ही सब कुछ है।
जब लड़का सीढ़ियों पर रोती हुई लड़की के पास जाता है, तो दिल पिघल जाता है। उसने हरे रूमाल से आंसू पोंछे, यह डिटेल बहुत प्यारी थी। गुमशुदा वारिस घर लौटी में ऐसे पल ही जान डालते हैं। उनकी आंखों में जो समझदारी और दर्द था, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
स्वेटर वाली महिला की आंखों में जो मजबूरी और गुस्सा था, वह साफ दिख रहा था। अमीरों के सामने खड़े होकर अपनी बात रखना आसान नहीं होता। गुमशुदा वारिस घर लौटी ने क्लास डिफरेंस को बहुत बारीकी से दिखाया है। उस महिला की चीख में एक मां का दर्द था जो किसी को भी रुला दे।
लड़की का रोना और फिर लड़के के सहारे संभलना, यह इमोशनल रोलरकोस्टर था। स्कूल यूनिफॉर्म में वह कितनी मासूम लग रही थी। गुमशुदा वारिस घर लौटी में किरदारों के इमोशन्स बहुत रियल लगते हैं। जब वह मुस्कुराई, तो लगा जैसे बादल छंट गए हों।
हॉल में हुआ वह झगड़ा सच में दिल दहला देने वाला था। एक तरफ रौबदार अंदाज और दूसरी तरफ मजबूरी। गुमशुदा वारिस घर लौटी ने सोसाइटी के इस सच को बहुत खूबसूरती से उजागर किया है। डायलॉग्स तेज थे और एक्टिंग लाजवाब। ऐसा लग रहा था जैसे मैं वहीं मौजूद हूं।