इस दृश्य में भावनाओं का जो विस्फोट हुआ है वह दिल दहला देने वाला है। जब माँ फोटो देखकर रो पड़ती हैं, तो लगता है जैसे जीवन भर का कर्ज़ चुकाना पड़ रहा हो। उस लड़की की आँखों में भी गहरा दर्द साफ दिख रहा है। कमरे का माहौल इतना भारी है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। हर किरदार का दर्द असली लगता है और दर्शक को बांधे रखता है।
वह आदमी जिसने थप्पड़ मारा, उसके चेहरे पर गुस्सा नहीं बल्कि बेबसी दिख रही थी। शायद वह भी इस स्थिति से टूट चुका है। जीवन भर का कर्ज़ सिर्फ पैसों का नहीं, रिश्तों का भी होता है। उसकी आवाज में जो कंपन था, वह बता रहा था कि वह अंदर से कितना टूटा हुआ है। यह दृश्य सिर्फ नाटक नहीं, एक सच्ची कहानी लगता है।
जब वह लड़की चुपचाप खड़ी थी, तो उसकी खामोशी सबसे ज्यादा चीख रही थी। उसकी आँखों में आंसू थे पर वह रो नहीं रही थी। जीवन भर का कर्ज़ कभी-कभी शब्दों से ज्यादा खामोशी में छुपा होता है। उसका हर भाव बता रहा था कि वह कितना कुछ सहन कर रही है। यह दृश्य देखकर लगता है कि हर किरदार के पास एक अधूरी कहानी है।
इस कमरे में बैठे हर इंसान के चेहरे पर टूटे हुए रिश्तों की कहानी लिखी है। जब वह बूढ़ा आदमी रोता है, तो लगता है जैसे उसने अपनी पूरी जिंदगी गंवा दी हो। जीवन भर का कर्ज़ कभी-कभी माफ़ी मांगने से भी नहीं चुकता। हर किरदार की पीड़ा अलग है, पर दर्द सबका एक जैसा है। यह दृश्य दिल को छू लेता है।
माँ के आंसू देखकर लगता है जैसे वह अपने बच्चों के लिए सब कुछ झेल रही हों। जब वह फोटो देखकर रोती हैं, तो उनकी आँखों में प्यार और दर्द दोनों साफ दिखते हैं। जीवन भर का कर्ज़ माँ के आँसुओं से भी भारी होता है। उनका हर भाव बताता है कि वह कितना कुछ सहन कर रही हैं। यह दृश्य देखकर आँखें नम हो जाती हैं।