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जीवन भर का कर्ज़वां17एपिसोड

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जीवन भर का कर्ज़

गौरी छह साल की थी जब उसने अपने भाई रजत की जान बचाई। उस हादसे में उसका दिमाग़ कमज़ोर हो गया। तब से घर में वह बोझ बन गई। माँ-बाप का सारा प्यार रजत को मिला, और रजत बड़ा होकर उससे शर्माने लगा। जब रजत की शादी तय हुई, तो माँ की मौन सहमति और पिता की कमज़ोरी के चलते उसे घर के बेकार बर्तन में छुपा दिया गया। वहीं उसकी जान चली गई।
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इस एपिसोड की समीक्षा

आईसीयू के बाहर टूटा दिल

अस्पताल के गलियारे में खड़ी वो माँ, जिसकी आँखों में बेबसी और डर साफ़ झलक रहा था, देखकर रूह कांप गई। जब बेटा गुस्से में मुट्ठी भींचता है और पिता छाती पकड़ लेते हैं, तो लगता है जैसे जीवन भर का कर्ज़ चुकाने का वक्त आ गया हो। हर चेहरे पर एक अलग दर्द है, और ये सन्नाटा चीख रहा है कि कुछ बहुत बुरा होने वाला है।

तस्वीर के सामने आंसू

मृतक की तस्वीर के सामने खड़ी वो लड़की, जिसकी आँखों में आंसू और चेहरे पर गहरा सदमा था, किसी कहानी का अंत नहीं बल्कि एक नई शुरुआत लग रही थी। उस कमरे की खामोशी और जलती हुई मोमबत्ती ने माहौल को और भी भावुक बना दिया। लगता है जैसे वो लड़की अपने आप से सवाल कर रही हो कि आखिर गलती किसकी थी।

गुस्सा और मजबूरी का टकराव

जब वो नौजवान लड़का नर्सिंग स्टेशन पर जाकर गुस्से में सवाल पूछता है, तो उसकी आवाज़ में दर्द साफ़ सुनाई दे रहा था। पीछे खड़े उसके माता-पिता की चिंता देखकर लगता है कि ये परिवार किसी बड़ी मुसीबत में फंस गया है। जीवन भर का कर्ज़ शायद इसी रिश्ते की टूटन से जुड़ा हो, जहाँ हर कोई अपने तरीके से रो रहा है।

माँ का कंपकंपाता हाथ

उस माँ के हाथों को देखकर जो उसके कोट को पकड़े कांप रहे थे, दिल दहल गया। वो सिर्फ़ डरी हुई नहीं थी, बल्कि टूट चुकी थी। जब उसका पति छाती पकड़कर खड़ा होता है, तो समझ आता है कि इस घर पर क्या बीत रही है। ये दृश्य बताता है कि कैसे एक छोटी सी गलती पूरे परिवार को जीवन भर का कर्ज़ दे सकती है।

शोक और सच्चाई का सामना

उस कमरे में खड़ा वो आदमी, जो शायद जिम्मेदार महसूस कर रहा था, उसकी आँखों में पछतावा साफ़ दिख रहा था। सामने खड़ी लड़की का रोना और वो तस्वीर, सब कुछ बता रहा था कि यहाँ क्या हुआ है। ये सिर्फ़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि रिश्तों की एक जंग थी जिसमें सब हार गए।

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