शुरुआत में ही माहौल इतना भारी लग रहा था कि सांस लेना मुश्किल हो गया। माँ के चेहरे पर वो मजबूरी और बेटे की आँखों में बेचैनी साफ दिख रही थी। जब वो पिताजी को खाना परोस रही थीं, तो लगा जैसे वो किसी बड़े तूफान से पहले की शांति हो। जीवन भर का कर्ज़ चुकाने जैसा लग रहा था उनका हर एक्शन। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखना दिल को छू लेता है।
जब वो खुशनुमा यादें फ्लैशबैक में आईं, तो लगा सब ठीक हो जाएगा, लेकिन अगले ही पल वापस उसी उदासी में आ गए। ये कंट्रास्ट बहुत तेज था। माँ का रोना और बेटे का चुपचाप सब सहना। फिर वो बाहर का सीन जहाँ सब कुछ बदल गया। जीवन भर का कर्ज़ शायद यही है कि आप अपने अपनों को चोट पहुँचाते हुए भी चुप रहें। कहानी की पकड़ बहुत गजब की है।
जैसे ही सरज रास्ते में मिला, हवा में करंट दौड़ गया। उसकी आँखों में गुस्सा और माँ के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था। वो लंच बॉक्स गिरना किसी बड़ी मुसीबत का संकेत था। लग रहा था कि अब बड़ा धमाका होने वाला है। जीवन भर का कर्ज़ अदा करने के चक्कर में शायद माँ ने कुछ छुपाया हो। सस्पेंस बना हुआ है कि आगे क्या होगा।
अंत में जब वो फोटो फ्रेम दिखा और सबके चेहरे पर सदमा, तो रोंगटे खड़े हो गए। वो लड़की जो पहले खुश दिख रही थी, अब उसकी फोटो पूजा घर में है? ये ट्विस्ट बिल्कुल उम्मीद नहीं था। माँ की चीख और बेटे की सन्न रह जाना। जीवन भर का कर्ज़ शायद उस लड़की की मौत से जुड़ा हो। नेटशॉर्ट पर ऐसे क्लिफहैंगर्स देखना एडिक्टिव हो जाता है।
माँ का किरदार बहुत दर्दनाक है। वो सब कुछ सह रही हैं लेकिन बोल नहीं पा रही हैं। बेटा भी पिता के डर से चुप है। ये खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। जब माँ ने खाना परोसा तो लगा वो अपने आंसुओं को निगल रही हैं। जीवन भर का कर्ज़ चुकाने के लिए शायद उन्होंने अपना सुख कुर्बान कर दिया हो। एक्टिंग बहुत नेचुरल है।