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जीवन भर का कर्ज़वां13एपिसोड

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जीवन भर का कर्ज़

गौरी छह साल की थी जब उसने अपने भाई रजत की जान बचाई। उस हादसे में उसका दिमाग़ कमज़ोर हो गया। तब से घर में वह बोझ बन गई। माँ-बाप का सारा प्यार रजत को मिला, और रजत बड़ा होकर उससे शर्माने लगा। जब रजत की शादी तय हुई, तो माँ की मौन सहमति और पिता की कमज़ोरी के चलते उसे घर के बेकार बर्तन में छुपा दिया गया। वहीं उसकी जान चली गई।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अंतिम विदाई का दर्द

जब एम्बुलेंस की रोशनी में शव को ढका गया, तो माँ का चीखना दिल दहला देने वाला था। जीवन भर का कर्ज़ चुकाने के लिए बेटे ने जो किया, वो किसी फिल्म से कम नहीं। रात के अंधेरे में उसकी आँखों में जो टूटन थी, वो शब्दों में बयां नहीं हो सकती।

माँ का रोना देखकर रुक गया सांस

उस पल जब माँ जमीन पर गिरकर रो रही थी, तो लगा जैसे समय थम गया हो। बेटा उसे संभाल रहा था, पर खुद भी टूट चुका था। जीवन भर का कर्ज़ की ये कहानी सिर्फ एक ड्रामा नहीं, बल्कि हर परिवार की सच्चाई है।

पिता की चुप्पी सबसे ज्यादा दर्दनाक

पिता जी की आँखों में आंसू थे, पर वो रो नहीं रहे थे। उनकी चुप्पी में इतना दर्द था कि लगता था जैसे वो सब कुछ सह रहे हों। जीवन भर का कर्ज़ में ये दृश्य सबसे ज्यादा दिल को छू गया।

बेटे का संघर्ष देखकर रो पड़े

बेटा खुद टूट चुका था, फिर भी माँ को संभाल रहा था। उसकी आँखों में जो दर्द था, वो किसी भी डायलॉग से ज्यादा असरदार था। जीवन भर का कर्ज़ की ये कहानी हर बेटे की कहानी है।

रात का माहौल और दर्द

रात के अंधेरे में एम्बुलेंस की रोशनी, पुलिस की टेप, और परिवार का रोना-धोना। जीवन भर का कर्ज़ का ये दृश्य इतना असली लगा कि लगा जैसे मैं भी वहीं खड़ा हूं।

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