नीलिमा मौसी का दर्द देखकर दिल पसीज गया। जब वह बड़ी टंकी के पास रोती है और फिर अस्पताल में बेहोश लड़की को देखकर चीखती है, तो लगता है जैसे जीवन भर का कर्ज़ चुकाना पड़ रहा हो। एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि स्क्रीन के बाहर से भी आवाज़ें सुनाई दे रही हैं।
वो सर्जिकल लाइट का सीन और फिर फ्लैशबैक में खुशियां... यह कंट्रास्ट कमाल का है। लड़की के चेहरे पर वो मुस्कान जो धीरे-धीरे आंसुओं में बदल जाती है, देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जीवन भर का कर्ज़ सिर्फ पैसों का नहीं, एहसास का भी होता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल ड्रामे ही देखने को मिलते हैं।
शुरुआत में भाई का गुस्सा और नीलिमा मौसी का डरना, फिर अंत में सबका एक साथ रोना। इमोशनल रोलरकोस्टर जैसा लग रहा है। जब वो लड़की ऑपरेशन थिएटर में जाती है और फोन गिर जाता है, तो सांस रुक गई। जीवन भर का कर्ज़ की कहानी हर किसी के दिल को छू लेगी।
रात के अंधेरे में वो बड़ी टंकी और नीलिमा मौसी का उसमें झांकना... सस्पेंस और डर का बेहतरीन मिश्रण। फिर अचानक हॉस्पिटल का सीन आता है और पता चलता है कि असली दर्द तो अब शुरू हुआ है। जीवन भर का कर्ज़ जैसे शो में ऐसे ट्विस्ट्स ही जान डालते हैं।
जब सर्जन बाहर आता है और नीलिमा मौसी की आंखों में वो उम्मीद और डर दोनों दिखते हैं, तो लगता है समय थम गया है। 'सर्जरी में' का बोर्ड देखकर जो घबराहट होती है, वो शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। जीवन भर का कर्ज़ ने सिखाया कि रिश्ते ही असली दौलत हैं।