जब वह लड़का छत के किनारे खड़ा था, तो मेरा दिल रुक सा गया। नीचे खड़ी उसकी माँ की चीखें और पिता की आँखों में आँसू देखकर लगता है जैसे जीवन भर का कर्ज़ चुकाना पड़ रहा हो। बारिश का मौसम इस दुख को और भी गहरा बना रहा है। यह दृश्य इतना भावुक है कि आँखें नम हो जाती हैं।
उस बूढ़ी माँ का चेहरा देखकर कोई भी पत्थर दिल इंसान भी रो पड़े। वह अपने बेटे को छत से नीचे उतरने के लिए गिड़गिड़ा रही है। उसकी आवाज़ में इतना दर्द है कि लगता है जैसे उसका दिल टुकड़े-टुकड़े हो रहा हो। जीवन भर का कर्ज़ शायद यही होता है जब माँ अपने बच्चे के लिए रोती है।
बारिश के बीच यह पूरा दृश्य एक फिल्म जैसा लग रहा है। गीली सड़क, आँसू और चीखें सब कुछ इतना वास्तविक है। वह लड़की जो कार से उतरी है, वह भी हैरान खड़ी है। लगता है जैसे जीवन भर का कर्ज़ इस बारिश में बह रहा हो। इस मंच पर ऐसे भावुक दृश्य देखना एक अलग ही अनुभव है।
सबसे ज्यादा दर्द उस पिता की आँखों में है जो कुछ बोल नहीं रहे लेकिन उनका चेहरा सब कुछ कह रहा है। वह अपने बेटे को देख रहे हैं और उनकी आँखों में बेबसी है। जीवन भर का कर्ज़ शायद यही होता है जब एक पिता अपने बेटे को खोने के कगार पर देखता है। यह दृश्य बहुत ही दिल दहला देने वाला है।
छत और जमीन के बीच की दूरी सिर्फ मीटर की नहीं, बल्कि भावनाओं की है। वह लड़का ऊपर खड़ा है और नीचे उसका परिवार उसे देख रहा है। हर कोई चीख रहा है लेकिन कोई सुन नहीं रहा। जीवन भर का कर्ज़ शायद यही होता है जब आप अपने परिवार को चोट पहुँचाते हैं। यह दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण है।