ऑफिस की शुरुआती सीन में जो गंभीर माहौल था, वो देखकर लग रहा था कि कोई बड़ी मुसीबत आने वाली है। लेकिन जैसे ही अखबार सामने आया और न्यूज चैनल पर खबर चली, सीन का पूरा मूड बदल गया। हुनर जो सच लगे वाली फीलिंग तब आई जब उस युवा लड़के की तस्वीर स्क्रीन पर दिखाई दी। डायरेक्टर ने टेंशन से रिलीफ तक का जो सफर दिखाया, वो कमाल का था।
पेरिस मोटर शो का सीन देखकर आंखें चौंधिया गईं। इतनी भीड़ और उत्साह किसी फिल्म में ही देखने को मिलता है। जब वो महिला माइक पर घोषणा कर रही थी और लोग खुशी से नाच रहे थे, तो लगा जैसे कोई बड़ा त्योहार हो। हुनर जो सच लगे वाला पल तब आया जब एक लड़का रोते हुए कॉन्ट्रैक्ट दिखा रहा था। इमोशन और एक्साइटमेंट का परफेक्ट मिक्स था।
अक्सर हम कॉल सेंटर वाले सीन्स को इग्नोर कर देते हैं, लेकिन यहाँ उस लड़की की मेहनत और तनाव को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। फोन पर बात करते हुए उसका चेहरा और आंखों में थकान साफ दिख रही थी। हुनर जो सच लगे वाली बात ये है कि बैकग्राउंड में चल रही न्यूज और स्टॉक मार्केट का ग्राफ उसकी नौकरी की अहमियत बता रहा था। रियलिस्टिक ड्रामा पसंद आया।
सड़क पर प्रदर्शन कर रहे लोगों का सीन देखकर लगा कि अब चीजें बदलने वाली हैं। 'हमें घरेलू गाड़ियां चाहिए' का नारा और लोगों का जुनून देखकर रोंगटे खड़े हो गए। हुनर जो सच लगे वाला मोड़ तब आया जब वो भीड़ शोरूम की तरफ दौड़ी। डायरेक्टर ने पब्लिक सेंटीमेंट को बहुत अच्छे से कैप्चर किया है। ये सीन फिल्म का हाईलाइट बन गया।
बॉस का गुस्सा और असिस्टेंट का शांत रहना, इन दोनों के बीच की केमिस्ट्री बहुत दमदार थी। जब बॉस टेबल थपथपा रहा था और असिस्टेंट चुपचाप खड़ा था, तो लगा कि कोई बड़ा धमाका होने वाला है। हुनर जो सच लगे वाली बात ये थी कि बिना ज्यादा डायलॉग के ही एक्टर्स ने अपनी बॉडी लैंग्वेज से पूरी कहानी कह दी। एक्टिंग क्लास लेने लायक है।