जब कमांडर ने वह रिपोर्ट पढ़ी, तो उनकी आंखों में जो डर और गुस्सा था, वह शब्दों से बयां नहीं हो सकता। अंतरिक्ष लिफ्ट का विस्फोट सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक बड़ी साजिश की शुरुआत लगती है। हुनर जो सच लगे में ऐसे मोड़ दर्शक को बांधे रखते हैं। नियंत्रण कक्ष का माहौल इतना तनावपूर्ण था कि सांस लेना भी मुश्किल हो गया।
बस में बैठे उन बुजुर्ग वैज्ञानिकों के चेहरे पर जो गंभीरता थी, वह किसी बड़े रहस्य की ओर इशारा कर रही थी। वे सब कुछ जानते हैं, पर बोल नहीं रहे। हुनर जो सच लगे की कहानी में यह चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचाती है। लैब में नक्शे पर उंगली फिराते हुए उनकी आंखों में चमक देखकर लगा कि वे कुछ बड़ा प्लान कर रहे हैं।
वह युवा लड़का जो होलोग्राम टावर को डिजाइन कर रहा था, उसकी आंखों में भविष्य का सपना था। जब उसने हेडफोन उतारे और स्क्रीन पर जीवन संकेत देखा, तो लगा कि वह अकेला ही इस मिशन की रीढ़ है। हुनर जो सच लगे में ऐसे किरदार दिल जीत लेते हैं। उसकी मुस्कान में एक अजीब सा आत्मविश्वास था जो मुझे बहुत पसंद आया।
रेगिस्तान में हेलीकॉप्टर के उतरते ही धूल का गुबार और तनाव दोनों बढ़ गए। कमांडर का उतरना और वैज्ञानिकों को बस से बाहर निकालना – सब कुछ इतना तेजी से हुआ कि सांस लेने का मौका नहीं मिला। हुनर जो सच लगे के इस सीन में एक्शन और ड्रामा का बेहतरीन मिश्रण था। कमांडर की मुट्ठी भींचने का शॉट तो दिल दहला देने वाला था।
जब कैमरा ने अंतरिक्ष स्टेशन को पृथ्वी के ऊपर तैरते हुए दिखाया, तो मैं बस देखता रह गया। यह दृश्य इतना शानदार था कि लग रहा था मैं खुद अंतरिक्ष में हूं। हुनर जो सच लगे की छायांकन कमाल की है। शटल का डॉकिंग और केबल का जाल – हर डिटेिल पर मेहनत साफ झलकती है। ऐसा लगता है जैसे भविष्य सचमुच आ गया हो।