हुनर जो सच लगे में विज्ञान की दुनिया में इंसानी जज्बातों का टकराव बहुत गहराई से दिखाया गया है। बूढ़े वैज्ञानिक की आंखों में छिपी पीड़ा और युवा कर्नल का दृढ़ संकल्प दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है। प्रयोगशाला के ठंडे माहौल में भी रिश्तों की गर्माहट महसूस होती है।
रेगिस्तान के बीच खड़ा विशाल परियोजना और उसके चारों ओर फैली सैन्य तैनाती देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। हुनर जो सच लगे की कहानी में तनाव और उम्मीद का अनोखा मिश्रण है। युवा नायक की आंखों में भविष्य के सपने और वर्तमान की चुनौतियां साफ झलकती हैं।
हर पात्र की अपनी एक कहानी है जो धीरे-धीरे खुलती जाती है। सफेद कोट पहने वैज्ञानिक का गुस्सा और चिंता दोनों ही स्वाभाविक लगते हैं। हुनर जो सच लगे में दिखाया गया हर भावना इतना वास्तविक है कि लगता है जैसे हम भी उस प्रयोगशाला में मौजूद हैं।
भविष्यवादी प्रौद्योगिकी और इंसानी रिश्तों के बीच का संघर्ष इस शो की खासियत है। स्क्रीन पर दिखाई देने वाले त्रिविमीय चित्र और उपग्रह मॉडल देखकर हैरानी होती है। हुनर जो सच लगे की कहानी बताती है कि प्रगति के रास्ते में कितनी कुर्बानियां देनी पड़ती हैं।
प्रयोगशाला के अंदर का तनाव और बाहर के रेगिस्तान की खामोशी एक दूसरे के विपरीत हैं। जब वैज्ञानिक और कर्नल आमने-सामने आते हैं तो संवाद में जो वजन होता है वह लाजवाब है। हुनर जो सच लगे में हर दृश्य के बाद अगले दृश्य की उत्सुकता बढ़ती जाती है।