अपराध सफाया में सफेद पट्टी बांधे हीरो की एंट्री देखकर रोंगटे खड़े हो गए। उसकी आंखों में जो गुस्सा और ठहराव है, वो किसी डायलॉग से ज्यादा बोलता है। बड़े गुंडे के सामने बिना डरे खड़ा होना और फिर एक ही झटके में पटक देना, ये सीन सिनेमाई लहजे में बेहतरीन बनाया गया है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे एक्शन सीन्स देखना सुकून देता है।
इस दृश्य में काली साड़ी पहनी महिला का किरदार सबसे ज्यादा आकर्षक लगा। वो चुपचाप बैठी सब देख रही है, लेकिन उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है। लगता है जैसे वो इस पूरे खेल की मास्टरमाइंड हो। अपराध सफाया की कहानी में ऐसे पात्रों का होना जरूरी है जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर दें। उसका स्टाइल और अंदाज लाजवाब है।
बड़ा गुंडा जो शुरू में बहुत घमंड में था और हीरो को हल्के में ले रहा था, उसका अंत बहुत ही संतोषजनक रहा। हीरो ने बिना ज्यादा मेहनत किए उसे जमीन पर गिरा दिया। ये दिखाता है कि असली ताकत शरीर में नहीं, हुनर में होती है। अपराध सफाया जैसे शो में ऐसे सीन्स ही असली मजा देते हैं। एक्शन कोरियोग्राफी बहुत साफ और तेज थी।
इस फाइट सीन का सेट और माहौल बहुत ही ड्रामेटिक था। बड़ा हॉल, क्रिस्टल झूमर और पीछे खड़े लोग, सब कुछ एक गंभीर माहौल बना रहे थे। नीली रोशनी का इस्तेमाल सीन को और भी रहस्यमयी बना रहा था। अपराध सफाया की प्रोडक्शन वैल्यू देखकर अच्छा लगा कि अब वेब सीरीज भी सिनेमा जैसी लग रही हैं। हर फ्रेम बहुत सोच समझकर बनाया गया है।
हीरो ने पूरे सीन में शायद ही कुछ बोला हो, लेकिन उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। जब वो गुंडे की तरफ बढ़ा, तो लगा जैसे मौत चल रही हो। उसकी बॉडी लैंग्वेज और चेहरे के भाव बता रहे थे कि वो जीतने के लिए आया है। अपराध सफाया में ऐसे किरदारों को देखना अच्छा लगता है जो कम बोलकर ज्यादा असर डालते हैं।