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अपराध सफायावां56एपिसोड

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अपराध सफाया

5 साल पहले पत्नी के धोखे, माता-पिता की हत्या और बहन के अपहरण से विक्रम राठौड़ की दुनिया उजड़ गई। जीवित बचकर वह लौटता है, “अंधकार मिटाने” की कसम के साथ। ड्रैगन सिंडिकेट में घुसकर वह अपराधियों का अंत करता है। दुश्मनों को सज़ा दिलाकर और असली मास्टरमाइंड को बेनकाब कर, वह समुद्रपुर को न्याय दिलाता है और अपने परिवार की आत्मा को शांति देता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रात की खामोशी में छिपा राज

अपराध सफाया की यह कड़ी सच में दिल दहला देने वाली है। जब वह आदमी कमरे में आता है और औरत उसे देखती है, तो नज़रों में जो तनाव है वो बयां नहीं किया जा सकता। फिर वह उसके पास जाती है, हाथ पकड़ती है, गले लगाती है... लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी ठंडक है। क्या यह प्यार है या कोई खेल? आखिर में वह फोन उठाता है और रात में कार में बैठकर किसी को देख रहा होता है। सब कुछ इतना सस्पेंस से भरा है कि सांस रुक जाए।

नज़रों का खेल और धोखे की बू

अपराध सफाया में यह सीन सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था। औरत शीशे के सामने बैठी है, पीछे से वह आदमी उसके कंधे पर हाथ रखता है। लगता है जैसे वह उसे सहला रहा हो, लेकिन उसकी आंखों में कोई गर्माहट नहीं। फिर वह फोन उठाता है और रात में कार में बैठकर किसी इमारत को घूर रहा होता है। क्या वह उसे धोखा दे रहा है? या फिर यह सब कोई बड़ी साजिश का हिस्सा है? हर फ्रेम में एक नया सवाल खड़ा हो जाता है।

प्यार या फिर कोई बड़ा षड्यंत्र?

अपराध सफाया की यह कड़ी देखकर लगता है कि हर चीज के पीछे कोई गहरा राज छिपा है। वह आदमी और औरत एक-दूसरे के करीब आते हैं, लेकिन उनकी आंखों में कोई भावना नहीं। फिर वह अचानक फोन उठाता है और रात में कार में बैठकर किसी को देख रहा होता है। क्या वह उसे धोखा दे रहा है? या फिर यह सब कोई बड़ी साजिश का हिस्सा है? हर फ्रेम में एक नया सवाल खड़ा हो जाता है।

शीशे में छिपा सच

अपराध सफाया में यह सीन सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था। औरत शीशे के सामने बैठी है, पीछे से वह आदमी उसके कंधे पर हाथ रखता है। लगता है जैसे वह उसे सहला रहा हो, लेकिन उसकी आंखों में कोई गर्माहट नहीं। फिर वह फोन उठाता है और रात में कार में बैठकर किसी इमारत को घूर रहा होता है। क्या वह उसे धोखा दे रहा है? या फिर यह सब कोई बड़ी साजिश का हिस्सा है? हर फ्रेम में एक नया सवाल खड़ा हो जाता है।

रात की खामोशी में छिपा राज

अपराध सफाया की यह कड़ी सच में दिल दहला देने वाली है। जब वह आदमी कमरे में आता है और औरत उसे देखती है, तो नज़रों में जो तनाव है वो बयां नहीं किया जा सकता। फिर वह उसके पास जाती है, हाथ पकड़ती है, गले लगाती है... लेकिन चेहरे पर एक अजीब सी ठंडक है। क्या यह प्यार है या कोई खेल? आखिर में वह फोन उठाता है और रात में कार में बैठकर किसी को देख रहा होता है। सब कुछ इतना सस्पेंस से भरा है कि सांस रुक जाए।

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