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अपराध सफायावां36एपिसोड

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अपराध सफाया

5 साल पहले पत्नी के धोखे, माता-पिता की हत्या और बहन के अपहरण से विक्रम राठौड़ की दुनिया उजड़ गई। जीवित बचकर वह लौटता है, “अंधकार मिटाने” की कसम के साथ। ड्रैगन सिंडिकेट में घुसकर वह अपराधियों का अंत करता है। दुश्मनों को सज़ा दिलाकर और असली मास्टरमाइंड को बेनकाब कर, वह समुद्रपुर को न्याय दिलाता है और अपने परिवार की आत्मा को शांति देता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

लिफ्ट में मौत का खेल

अपराध सफाया की यह लिफ्ट वाली सीन देखकर रोंगटे खड़े हो गए। संकरा स्पेस, तीनों तरफ से हमला और फिर वो खूनी चाकू। एक्शन इतना तेज है कि सांस लेने का मौका नहीं मिलता। दीवारों पर लगे पोस्टर और गंदा माहौल डर को और बढ़ा देता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे थ्रिलर देखना एक अलग ही अनुभव है।

चश्मे वाली लड़की का खतरनाक रूप

शुरुआत में लगता था कि वह लड़की बेचारी फंस गई है, लेकिन जब उसने चाकू निकाला तो सबकी बोलती बंद हो गई। अपराध सफाया में ऐसे ट्विस्ट ही तो जान डालते हैं। उसकी आंखों में वो पागलपन और चेहरे पर मुस्कान देखकर डर लगा। काश यह सीन थोड़ा और लंबा होता।

ब्लॉन्ड हेयर वाले का अंत

वो सिगरेट पीने वाला गुंडा कितना घमंडी था, लेकिन लिफ्ट के अंदर उसकी हालत खराब हो गई। अपराध सफाया की कहानी में हर किरदार का अंजाम ऐसा ही मिलना चाहिए। जब वह चीख रहा था तो मजा आ गया। एक्शन सीन्स की कोरियोग्राफी बहुत ही जबरदस्त है।

तंग जगह में बड़ा धमाका

इतनी छोटी लिफ्ट में इतना बड़ा फाइट सीन कैसे फिल्माया होगा? अपराध सफाया की टीम ने कमाल कर दिया। कैमरा एंगल और लाइटिंग ने माहौल को और भी डरावना बना दिया। जब वो तीनों एक दूसरे पर टूट पड़े तो लगा जैसे लिफ्ट टूट जाएगी। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट की कमी थी।

खून से सनी दीवारें

लिफ्ट की दीवारों पर लगा खून और फटे हुए पोस्टर कहानी का हिस्सा बन गए हैं। अपराध सफाया में सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि सेट डिजाइन भी बहुत गहराई से किया गया है। जब वो लड़की दीवार से सटकर लड़ी तो लगा जैसे वह खुद उस जगह का हिस्सा बन गई हो। बहुत ही रॉ एंड रियलिस्टिक फील है।

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