वीडियो की शुरुआत में ही 'जीवन और मृत्यु का अनुबंध' दिखाकर अपराध सफाया का माहौल बहुत गहरा कर दिया गया है। सफेद पट्टी बांधे युवक की हिम्मत देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वह विशालकाय गुंडे के सामने अकेला खड़ा होता है और बिना डरे लड़ता है। हालांकि अंत में वह बुरी तरह घायल होकर गिर जाता है, लेकिन उसकी आंखों में हार नहीं दिखती। यह दृश्य दर्शाता है कि इस गैंगवार में जान की कोई कीमत नहीं है।
लाल चमड़े का सूट पहने वह व्यक्ति पूरे हॉल पर राज कर रहा है। वह कुर्सी पर लेटा हुआ है, लेकिन उसकी मौजूदगी से पूरा कमरा थर्रा रहा है। जब वह हंसता है या इशारा करता है, तो सबकी सांसें रुक जाती हैं। अपराध सफाया के इस एपिसोड में उसका किरदार सबसे ज्यादा प्रभावशाली लगा। वह न तो चिल्लाता है और न ही हिलता है, बस अपनी आंखों से सब कुछ कंट्रोल करता है। असली ताकतवर वही होता है जो शांत रहकर तूफान ला सकता है।
काली साड़ी और सफेद फूल पहनी वह महिला बीच में बैठी है, लेकिन उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही है। जब युवक को पीटा जा रहा था, तो उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था, बस एक अजीब सी मुस्कान थी। लगता है कि अपराध सफाया की कहानी में उसका रोल बहुत बड़ा होने वाला है। वह सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि इस खेल की मास्टरमाइंड लग रही है। उसकी आंखों में एक अलग ही चमक है जो बताती है कि वह सब कुछ जानती है।
यह लड़ाई बिल्कुल भी बराबर नहीं थी। विशालकाय गुंडे ने उस नौजवान को इतनी बुरी तरह पीटा कि देखने वालों का कलेजा मुंह को आ गया। हर मुक्के के साथ लग रहा था कि हड्डियां टूट रही हैं। अपराध सफाया के इस सीन में एक्शन बहुत रॉ और रियलिस्टिक था। खून बहना और जमीन पर गिरना दिखाकर डायरेक्टर ने दर्द को बहुत करीब से महसूस कराया। यह कोई हीरोइज्म नहीं, बल्कि क्रूरता का जीता जागता उदाहरण था जो दिल दहला गया।
पीछे खड़ी भीड़ का रिएक्शन देखना सबसे दिलचस्प था। सबके सिर पर सफेद पट्टियां थीं, जो शायद शोक या वफादारी का निशान थीं। जब लड़ाई हो रही थी, तो कोई आगे नहीं आया। सब बस तमाशबीन बने रहे। अपराध सफाया में इस भीड़ के माध्यम से डर का माहौल बहुत अच्छे से दिखाया गया है। उनकी आंखों में सहम थी, लेकिन जुबान पर ताला। यह दिखाता है कि उस गैंग में नियम कितने सख्त हैं और टकराने का नतीजा क्या होता है।