बारिश के दृश्य में जब वह लड़का खिड़की से अंदर देख रहा था, तो उसकी आँखों में जो उदासी थी, वह दिल को छू गई। पहला प्यार, आखिरी अलविदा की कहानी यहीं से शुरू होती है जहाँ बाहर खड़े लोग अंदर की खुशियों को सिर्फ देख सकते हैं।
अंदर केक और हंसी-मजाक, बाहर गंभीर चेहरे और भीगते कपड़े। यह विरोधाभास बहुत गहरा है। जब वह लड़का केक लेकर आया और बाहर वाला बच्चा उसे देख रहा था, तो लगा जैसे दो अलग-अलग दुनिया एक खिड़की से जुड़ी हों। पहला प्यार, आखिरी अलविदा का यह मोड़ बहुत भावुक कर देने वाला है।
सफेद सूट पहनी महिला के चेहरे के भाव बहुत जटिल हैं। वह अंदर तो हंस रही है, लेकिन बाहर खड़े लोगों को देखकर उसकी आँखों में एक अजीब सी चिंता दिखाई देती है। क्या वह उस लड़के को जानती है? पहला प्यार, आखिरी अलविदा में यह किरदार सबसे ज्यादा रहस्यमयी लग रहा है।
कांच की खिड़की सिर्फ एक रुकावट नहीं, बल्कि एक प्रतीक है। एक तरफ गर्माहट और त्योहार, दूसरी तरफ ठंड और अलगाव। जब वह आदमी और बच्चा बाहर खड़े होकर अंदर देख रहे थे, तो लगा जैसे वे अपनी ही कहानी में कैद हों। पहला प्यार, आखिरी अलविदा का यह दृश्य बहुत प्रभावशाली है।
हरा कोट पहने उस बच्चे के चेहरे पर सवालों का अंबार था। वह समझ नहीं पा रहा था कि अंदर क्या चल रहा है और वह बाहर क्यों है। उसकी मासूमियत और हैरानी देखकर दिल भारी हो गया। पहला प्यार, आखिरी अलविदा में बच्चों के किरदार बहुत सहज लगे हैं।