लाल साड़ी पहने वो महिला जब कुर्सी से उठी तो माहौल में सनसनी दौड़ गई। उसने कागज पकड़ा और सीधे उस लड़के के पास गई जो बंधा हुआ था। फिर अचानक उसने चाकू निकाला और नीले सूट वाले आदमी की गर्दन पर रख दिया। पहला प्यार, आखिरी अलविदा की तरह ये दृश्य दिल दहला देने वाला था। उसकी आँखों में गुस्सा और ठंडक दोनों थी।
नीली शर्ट वाला बच्चा बिल्कुल डरा हुआ लग रहा था। उसके हाथ रस्सी से बंधे थे और वो बस सबको देख रहा था। लाल पोशाक वाली महिला जब उसके पास से गुजरी तो उसकी नजरें बच्चे पर टिकी थीं। पहला प्यार, आखिरी अलविदा में ऐसे दृश्य दर्शकों को झकझोर देते हैं। बच्चे की मासूमियत और बड़ों की हिंसा का ये टकराव बहुत गहरा था।
नीले सूट वाला आदमी शुरू में शांत लग रहा था, लेकिन जब लाल पोशाक वाली महिला ने चाकू उसकी गर्दन पर रखा तो उसके चेहरे पर डर साफ दिख रहा था। उसके पीछे खड़ा चमड़े की जैकेट वाला दोस्त मुस्कुरा रहा था, जो और भी डरावना था। पहला प्यार, आखिरी अलविदा की तरह ये मोड़ अनपेक्षित था। हर फ्रेम में तनाव बढ़ता गया।
सफेद और काली ड्रेस पहने वो महिला बिल्कुल शांत बैठी थी, लेकिन उसकी आँखों में कुछ छिपा था। जब लाल पोशाक वाली महिला चाकू लेकर आगे बढ़ी तो उसने बस एक नजर देखा और फिर आँखें मूंद लीं। पहला प्यार, आखिरी अलविदा में ऐसे किरदार अक्सर कहानी की चाबी होते हैं। वो क्या जानती थी? क्या वो सबके पीछे थी?
लाल पोशाक वाली महिला ने चाकू निकाला और उसे नीले सूट वाले आदमी की गर्दन पर रख दिया। उसकी उंगलियाँ काँप नहीं रही थीं, बल्कि स्थिर थीं। ये दिखाता है कि वो इस काम के लिए तैयार थी। पहला प्यार, आखिरी अलविदा में ऐसे दृश्य दर्शकों की सांस रोक देते हैं। उसकी आवाज में गुस्सा था, लेकिन आँखों में ठंडक।