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पहला प्यार, आखिरी अलविदावां38एपिसोड

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पहला प्यार, आखिरी अलविदा

नीलम को कैंसर हो गया, लेकिन उसके परिवार ने उसे अनदेखा कर दिया। वह एक प्रयोग के तहत जम कर ठंडी कर दी गई और ठीक होकर वापस आई। अब प्रोफेसर लिसा बनकर उसने लिवर कैंसर की विशेषज्ञ के रूप में अपनी पहचान बनाई। वह अपने नए पति आदित्य और दत्तक पुत्र पवन के साथ शानदार वापसी करती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

खुशियों का झूठा मुखौटा

शुरुआत में जो पारिवारिक सुकून दिखाया गया, वह वास्तव में एक बड़ा धोखा था। रसोई में हंसी-मजाक और पति का प्यार भरा व्यवहार देखकर लगता था कि यह एक आदर्श परिवार है, लेकिन अंत में जब वैन आती है और महिला का अपहरण होता है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पहला प्यार, आखिरी अलविदा की तरह यह कहानी भी हमें सिखाती है कि बाहरी चमक हमेशा सच नहीं होती। उस फोन की कॉल और गिरा हुआ मोबाइल देखकर दिल दहल गया।

पति का संदेहजनक व्यवहार

क्या आपको भी पति के हाव-भाव में कुछ अजीब लगा? जब वह पत्नी के कंधे दबा रहा था, तो उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी जो प्यार से ज्यादा साजिश लग रही थी। शायद वह पहले से ही इस अपहरण की योजना बना चुका था। बेटे के साथ उसकी हंसी भी अब मुझे नाटकीय लग रही है। पहला प्यार, आखिरी अलविदा में भी ऐसे ही मोड़ आते हैं जहां करीबी लोग ही दुश्मन बन जाते हैं। यह वीडियो देखकर अब किसी पर भी भरोसा करना मुश्किल हो गया है।

मासूम बच्चे की मासूमियत

इस पूरे नाटक में सबसे ज्यादा तरस उस छोटे बच्चे पर आता है जो कुछ भी नहीं जानता। वह रसोई में मां के साथ खुशी से बातें कर रहा था और अगले ही पल उसकी दुनिया उजड़ गई। जब वैन में से वह व्यक्ति निकला और उसने मां को पकड़ा, तो बच्चे का चेहरा देखने को नहीं मिला, जो और भी दर्दनाक है। पहला प्यार, आखिरी अलविदा की तरह यह कहानी भी बेगुनाहों के दर्द को बयां करती है। काश वह वैन कभी न आती और यह परिवार ऐसे ही खुश रहता।

सस्पेंस का बेहतरीन निर्माण

निर्देशक ने बहुत ही चालाकी से दर्शकों को गुमराह किया है। पहले एक घंटे तक हमें लगता है कि यह एक रोमांटिक फैमिली ड्रामा है, लेकिन अंतिम दृश्य में सब कुछ बदल जाता है। सफेद वैन, काले कपड़ों वाला व्यक्ति और जबरदस्ती रुमाल से मुंह दबाना - यह सब क्लासिक थ्रिलर तत्व हैं। पहला प्यार, आखिरी अलविदा में भी ऐसे ही ट्विस्ट होते हैं जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। यह वीडियो क्लिप एक पूरी फिल्म का सार प्रस्तुत करती है।

महिला की बेबसी और संघर्ष

उस महिला की आंखों में जब वह वैन के पास खड़ी थी, एक अजीब सी बेचैनी थी। शायद उसे अंदर से कुछ गड़बड़ का अहसास हो रहा था। जब वह व्यक्ति आया और उसने जबरदस्ती किया, तो उसका संघर्ष देखकर दिल रो उठा। उसका गिरा हुआ फोन जिस पर डॉक्टर मा लिखा था, शायद उसकी आखिरी उम्मीद थी जो अधूरी रह गई। पहला प्यार, आखिरी अलविदा में भी नायिका को ऐसे ही संघर्ष करने पड़ते हैं। यह दृश्य बहुत ही हृदयविदारक है।

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