उस लड़की की आँखों में जो दर्द है, वो किसी भी डायलॉग से ज्यादा गहरा है। जब वह हरे रंग से सनी ड्रेस में खड़ी होती है, तो लगता है जैसे उसकी मासूमियत पर किसी ने दाग लगा दिया हो। तीन मामाओं का पछतावा देखकर समझ आता है कि बच्चों की दुनिया कितनी नाजुक होती है। वयस्कों की बेरुखी ने उसे अकेला कर दिया है।
सीढ़ियों से उतरती नौकरानी का चेहरा देखकर ही समझ आ गया कि अब तूफान आने वाला है। उसने कपड़े फेंके और चिल्लाई, लेकिन वह छोटी बच्ची बस चुपचाप सब सहती रही। तीन मामाओं का पछतावा इस बात पर है कि घर के बड़े लोग बच्चों की भावनाओं को कितनी आसानी से नजरअंदाज कर देते हैं। यह दृश्य दिल को छू लेता है।
जब उसने वह लाल कपड़ा उठाया और उस पर लिखा नाम देखा, तो उसके चेहरे के भाव बदल गए। शायद यह कपड़ा किसी खास इंसान का था जो अब नहीं रहा। तीन मामाओं का पछतावा इस मोड़ पर और गहरा हो जाता है। बच्ची की उदासी अब गुस्से में बदल रही है। यह कहानी आगे बहुत इमोशनल होने वाली है।
सूट-बूट पहने लोग और एक मैली ड्रेस में बच्ची, यह कंट्रास्ट बहुत तेज है। कमरे का माहौल दिखाता है कि यहाँ पैसे की कमी नहीं, लेकिन प्यार की कमी है। तीन मामाओं का पछतावा इसी बात पर है कि दौलत होने के बावजूद यह परिवार टूटा हुआ लगता है। बच्ची की आँखों में सवाल हैं जिनका जवाब किसी के पास नहीं है।
नीली ड्रेस वाली महिला ने जब उस साफ-सुथरी बच्ची को गले लगाया, तो क्या वह सच्चा प्यार था या बस दिखावा? वहीं दूसरी तरफ हरी ड्रेस वाली बच्ची अकेली खड़ी है। तीन मामाओं का पछतावा इस भेदभाव को देखकर और बढ़ जाता है। बच्चों के बीच यह फर्क करना कितना गलत है, यह दृश्य बखूबी दिखाता है।