जब छोटी लड़की घास पर गिरती है और खून से सनी उंगलियां दिखाती है, तो दिल दहल जाता है। तीन मामाओं का पछतावा शायद इसी पल शुरू हुआ होगा। उसकी आंखों में डर और अकेलापन साफ झलकता है। रात का अंधेरा और उसकी सफेद पोशाक एक अजीब सी विषाद छवि बनाती है।
उसकी आंखों से आंसू टपकते हैं, लेकिन वह कुछ नहीं बोलती। शायद वह सब कुछ देख चुकी है जो एक बच्चे को नहीं देखना चाहिए। तीन मामाओं का पछतावा उसकी चुप्पी में छिपा है। जब वह ऊपर देखती है, तो लगता है जैसे कोई उसका इंतज़ार कर रहा हो।
हर घास का तिनका उसकी पीड़ा का गवाह बन गया है। वह लेटी है, लेकिन उसकी सांसें बताती हैं कि वह अभी भी जीवित है। तीन मामाओं का पछतावा शायद उसकी सांसों में बसा है। जब वह उठती है, तो लगता है जैसे वह किसी नई शुरुआत की ओर बढ़ रही हो।
जब वह खड़ी होती है और पीछे मुड़कर देखती है, तो लगता है जैसे वह अपने अतीत से बात कर रही हो। तीन मामाओं का पछतावा उसकी आंखों में चमकता है। रात की रोशनी उसकी पीड़ा को और भी गहरा बना देती है।
वह कुछ नहीं बोलती, लेकिन उसकी आंखें सब कुछ कह जाती हैं। तीन मामाओं का पछतावा उसकी चुप्पी में छिपा है। जब वह ऊपर देखती है, तो लगता है जैसे वह किसी से मदद मांग रही हो।