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तीन मामाओं का पछतावा

ईशा सिंह की मौत के बाद उसकी बीमार बेटी जिया अकेली रह जाती है। एक नकली बच्ची उसकी पहचान चुरा लेती है, और जिया को अपने ही मामाओं के घर एक तरह से प्रताड़ित अनाथ की तरह रहना पड़ता है। झूठे इल्ज़ाम में फँसने के बाद, जिया सबसे नाता तोड़ लेती है और अपनी माँ की सहेली जुही के पास शरण लेती है। जब सच्चाई सामने आती है, तब मामा लोग माफी की भीख माँगते हैं, लेकिन जिया के चेहरे पर सिर्फ खामोशी होती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

संजना की क्रूरता ने दिल तोड़ दिया

संजना शर्मा का व्यवहार देखकर रोंगटे खड़े हो गए। अपनी ही बेटी बिंदी के सामने उसने जो तस्वीर फाड़ा, वो सिर्फ कागज नहीं, एक मासूम बच्चे के भरोसे को चीर रहा था। तीन मामाओं का पछतावा देखने के बाद समझ आया कि कैसे लालच इंसान को अंधा कर देता है। संजना की मुस्कान के पीछे छिपी नफरत साफ दिख रही थी।

बिंदी की आँखों में डर साफ था

बिंदी जब जमीन पर गिरती है और अपनी चेन ढूंढती है, तो उसकी मासूमियत दर्दनाक लगती है। संजना का उसे धक्का देना और फिर तस्वीर फाड़कर हंसना दिखाता है कि वो कितनी बेरहम हो चुकी है। तीन मामाओं का पछतावा में ऐसे दृश्य दिल दहला देते हैं। बिंदी का रोना और संजना का ठहाका एकदम विपरीत भावनाएं हैं।

तस्वीर फाड़ने का दृश्य यादगार है

जब संजना ने उस लड़की की तस्वीर को गुस्से में फाड़ा, तो बिंदी की चीख सुनकर रूह कांप गई। ये सिर्फ एक हरकत नहीं, बल्कि एक मां के किरदार का पतन था। तीन मामाओं का पछतावा में ये पल सबसे ज्यादा भारी लगा। संजना की आँखों में कोई पछतावा नहीं, बस जीत की चमक थी, जो डरावनी थी।

संजना और बिंदी का रिश्ता टूट गया

शुरुआत में हाथ पकड़कर चलना और फिर धक्का देकर गिराना, ये बदलाव बहुत तेज था। संजना ने बिंदी को सिर्फ एक मोहरा समझ लिया है। तीन मामाओं का पछतावा में ये रिश्ते की जटिलताएं बहुत गहराई से दिखाई गई हैं। बिंदी अब अपनी मां से डरने लगी है, ये भावना चेहरे पर साफ थी।

काले कोट वाली औरत कौन है

वो औरत जो बीच में खड़ी होकर सब देख रही थी, उसकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। शायद वो संजना की साजिश का हिस्सा है या फिर मजबूर गवाह। तीन मामाओं का पछतावा में हर किरदार के पीछे एक राज छिपा है। उसकी गंभीर मुद्रा बता रही थी कि आगे कुछ बड़ा होने वाला है।

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