बच्ची की आँखों में जो डर था, वो सीधे दिल में उतर गया। माँ का फोन कॉल और फिर वो सन्नाटा... सब कुछ इतना रियल लगा कि साँस रुक गई। तीन मामाओं का पछतावा देखकर लगता है कि हर परिवार की कहानी में कुछ न कुछ छिपा होता है। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामे देखना अब मेरी आदत बन गई है।
उस महिला की आँखों में जो आँसू थे, वो शब्दों से बयां नहीं किए जा सकते। फोटो को छाती से लगाकर रोना... ये सीन देखकर मैं भी रो पड़ी। तीन मामाओं का पछतावा सिर्फ एक ड्रामा नहीं, बल्कि एक भावनात्मक सफर है। नेटशॉर्ट की कहानियाँ हमेशा दिल को छू लेती हैं।
तीनों युवक सोफे पर बैठे थे, लेकिन उनकी आँखों में कितनी बातें छिपी थीं। कोई कुछ नहीं बोल रहा था, बस एक-दूसरे को देख रहे थे। तीन मामाओं का पछतावा में ऐसे सीन्स बहुत गहरे हैं। नेटशॉर्ट पर ये शो देखना मेरे लिए एक नया अनुभव रहा।
बटलर का वो अचानक हंसना और फिर कपड़े ले जाना... कुछ तो गड़बड़ है। ये सीन देखकर लगा कि कहानी में कोई बड़ा ट्विस्ट आने वाला है। तीन मामाओं का पछतावा में हर किरदार की अपनी एक रहस्यमयी कहानी है। नेटशॉर्ट की स्टोरीटेलिंग कमाल की है।
माँ ने फोन किया, लेकिन बच्ची ने कुछ नहीं कहा। बस आँखों से देखती रही। ये सीन इतना इमोशनल था कि मैं भी रो पड़ी। तीन मामाओं का पछतावा में ऐसे मोमेंट्स बहुत हैं जो दिल को छू लेते हैं। नेटशॉर्ट पर ये शो देखना मेरे लिए एक भावनात्मक यात्रा रही।