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तीन मामाओं का पछतावा

ईशा सिंह की मौत के बाद उसकी बीमार बेटी जिया अकेली रह जाती है। एक नकली बच्ची उसकी पहचान चुरा लेती है, और जिया को अपने ही मामाओं के घर एक तरह से प्रताड़ित अनाथ की तरह रहना पड़ता है। झूठे इल्ज़ाम में फँसने के बाद, जिया सबसे नाता तोड़ लेती है और अपनी माँ की सहेली जुही के पास शरण लेती है। जब सच्चाई सामने आती है, तब मामा लोग माफी की भीख माँगते हैं, लेकिन जिया के चेहरे पर सिर्फ खामोशी होती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

टूटी तस्वीर का दर्द

जब उस आदमी ने जमीन से टूटी हुई तस्वीर उठाई, तो कमरे में सन्नाटा छा गया। बच्ची की आँखों में डर और गुस्सा दोनों साफ दिख रहे थे। तीन मामाओं का पछतावा उस पल और गहरा हो गया जब उसने तस्वीर का टुकड़ा बच्ची को दिया। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएँ थीं—कुछ शर्मिंदा, कुछ गुस्से में, और कुछ बस देख रहे थे। यह दृश्य दिल को छू लेता है।

बच्ची की चुप्पी सबसे तेज चीख है

वह छोटी बच्ची बिना कुछ बोले सब कुछ कह गई। उसकी आँखों में जो दर्द था, वह किसी डायलॉग से ज्यादा असरदार था। जब उसने तस्वीर का टुकड़ा लिया, तो लगा जैसे उसने अपना दिल संभाल लिया हो। तीन मामाओं का पछतावा उसकी चुप्पी में और भी गूंजता है। ऐसे दृश्य दिखाते हैं कि बच्चे कितना कुछ समझते हैं, भले ही वे बोलें नहीं।

सूट वाले आदमी का दोहरा चेहरा

पहले वह गुस्से में लग रहा था, फिर अचानक मुस्कुरा दिया। यह बदलाव चौंकाने वाला था। क्या वह सच में बदल गया या बस दिखावा कर रहा है? तीन मामाओं का पछतावा उसकी इस मुस्कान में और भी गहरा लगता है। उसने बच्ची को तस्वीर देकर शायद अपना अपराध बोध कम करने की कोशिश की। लेकिन क्या यह काफी है?

बैंगनी ड्रेस वाली महिला का रवैया

उस महिला ने शुरू में घमंड दिखाया, लेकिन बाद में उसकी आँखों में पछतावा झलका। जब उसने बच्ची को देखा, तो उसका चेहरा नरम पड़ गया। तीन मामाओं का पछतावा उसके हर हाव-भाव में दिखता है। शायद उसे एहसास हो गया कि उसने क्या गलत किया। उसकी खामोशी भी एक तरह का माफीनामा थी।

दो बच्चियों का अलग-अलग डर

एक बच्ची चुपचाप खड़ी थी, जबकि दूसरी को जबरदस्ती चुप कराया गया। यह अंतर दिल दहला देने वाला था। तीन मामाओं का पछतावा इन दोनों के डर में साफ दिखता है। एक की आँखों में सवाल थे, तो दूसरी की आँखों में बेबसी। यह दृश्य दिखाता है कि बच्चों पर वयस्कों के झगड़ों का कितना गहरा असर पड़ता है।

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