जब माँ और बेटी पेंटिंग कर रहे थे, तो सब कुछ इतना सुंदर लग रहा था। लेकिन अचानक तीन आदमियों का आगमन ने सब बदल दिया। उनकी आँखों में डर और हैरानी साफ दिख रही थी। तीन मामाओं का पछतावा शायद यहीं से शुरू हुआ होगा। बच्ची की मासूमियत और माँ की चिंता दिल को छू गई।
इस दृश्य में माँ का चेहरा देखकर लगता है कि वह कुछ छिपा रही है। बेटी भी समझदार है, वह सब कुछ महसूस कर रही है। जब वे भागने लगे, तो लगा कि कोई बड़ा राज खुलने वाला है। तीन मामाओं का पछतावा की कहानी में यह मोड़ बहुत ही रोचक है।
शुरुआत में सब कुछ शांत था, रंगों की खुशबू और बगीचे की हरियाली। लेकिन फिर अचानक तीन आदमियों का आना और उनका डरावना चेहरा। माँ ने बेटी को संभाला और भागने की तैयारी की। तीन मामाओं का पछतावा में यह दृश्य बहुत ही तनावपूर्ण है।
बेटी की आँखों में सवाल थे, लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी। माँ भी चुप थी, बस उसे संभाल रही थी। जब वे भागे, तो लगा कि कोई बड़ा खतरा आने वाला है। तीन मामाओं का पछतावा की यह कहानी बहुत ही दिलचस्प है।
तीन आदमियों का आगमन और उनका डरावना चेहरा। वे क्या चाहते हैं?माँ क्यों डर रही है?बेटी को क्या समझ आ रहा है?तीन मामाओं का पछतावा में यह रहस्य बहुत ही रोचक है। हर दृश्य में नया सवाल उठता है।