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तीन मामाओं का पछतावावां24एपिसोड

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तीन मामाओं का पछतावा

ईशा सिंह की मौत के बाद उसकी बीमार बेटी जिया अकेली रह जाती है। एक नकली बच्ची उसकी पहचान चुरा लेती है, और जिया को अपने ही मामाओं के घर एक तरह से प्रताड़ित अनाथ की तरह रहना पड़ता है। झूठे इल्ज़ाम में फँसने के बाद, जिया सबसे नाता तोड़ लेती है और अपनी माँ की सहेली जुही के पास शरण लेती है। जब सच्चाई सामने आती है, तब मामा लोग माफी की भीख माँगते हैं, लेकिन जिया के चेहरे पर सिर्फ खामोशी होती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

बच्ची की आँखों में दर्द

तीन मामाओं का पछतावा में सबसे दिल दहला देने वाला पल वो है जब सफेद पोशाक वाली बच्ची जमीन पर गिरती है और कोई उसे उठाने नहीं आता। उसकी मासूमियत और टूटे हुए दिल को कैमरे ने बहुत करीब से पकड़ा है। बाकी लोग हँस रहे हैं, लेकिन वो अकेली रो रही है। ये दृश्य बताता है कि कैसे एक परिवार में भी कोई अकेला पड़ सकता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे इमोशनल सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

माँ का पक्षपात साफ दिख रहा है

नीली साड़ी वाली महिला का व्यवहार सच में चौंकाने वाला है। वो अपनी बेटी को गोद में उठाकर प्यार करती है, जबकि दूसरी बच्ची को नजरअंदाज कर देती है। तीन मामाओं का पछतावा की कहानी में ये किरदार दिखाता है कि कैसे माँ का प्यार भी कभी-कभी अन्यायपूर्ण हो सकता है। उसकी आँखों में घमंड और दूसरी बच्ची के प्रति उपेक्षा साफ झलकती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे रियलिस्टिक ड्रामा देखना एक अलग ही अनुभव है।

काले सूट वाले शख्स की चुप्पी

काले सूट वाले व्यक्ति का किरदार बहुत रहस्यमयी है। वो सब कुछ देख रहा है लेकिन चुप है। तीन मामाओं का पछतावा में जब वो बच्ची के पास झुकता है, तो लगता है कि वो उसे समझ रहा है, लेकिन फिर भी कुछ नहीं करता। उसकी चुप्पी शायद मजबूरी है या फिर वो इस नाटक का हिस्सा है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे किरदारों को समझना दर्शकों के लिए एक पहेली बन जाता है।

गुलाबी पोशाक वाली बच्ची की खुशी

गुलाबी पोशाक वाली बच्ची की खुशी देखकर अच्छा लगता है, लेकिन ये खुशी दूसरी बच्ची के दर्द के ऊपर बनी है। तीन मामाओं का पछतावा में जब उसे गोद में उठाया जाता है, तो वो मुस्कुराती है, लेकिन पीछे खड़ी बच्ची की आँखों में आँसू हैं। ये दृश्य बताता है कि कैसे एक की खुशी दूसरे के दुख का कारण बन सकती है। नेटशॉर्ट पर ऐसे इमोशनल मोड़ देखकर दिल भर आता है।

बिछड़े हुए परिवार की कहानी

तीन मामाओं का पछतावा की कहानी एक बिछड़े हुए परिवार की लगती है। जब सभी लोग एक साथ होते हैं, तो भी कोई किसी के करीब नहीं है। बच्ची का अकेले कमरे से निकल जाना इस बात का सबूत है कि वो इस माहौल से दूर भागना चाहती है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामा देखकर लगता है कि कभी-कभी रिश्ते सिर्फ नाम के होते हैं, असलियत में वो टूटे हुए होते हैं।

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