इस नाटक में बूढ़ी महिला की आंखों में दर्द साफ दिखता है। उसने लड़के को रोका पर वो चला गया। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी बहुत गहरी है। परिवार के रिश्ते कैसे टूटते हैं ये देखकर दिल दुख जाता है। हर अभिनय बहुत असली लगता है। मैं हर कड़ी का इंतज़ार करती हूं। यह कहानी हमें सिखाती है कि भरोसा कितना नाज़ुक होता है। सच्चाई सामने आने में वक्त लगता है पर आती जरूर है। बहुत ही बेहतरीन निर्माण है।
नौजवान लड़के का व्यवहार बहुत सख्त लगता है। फोन में तस्वीर देखकर वो बदल जाता है। झूठी कसम, सच्ची लगन में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। उसने अपनी बुजुर्ग की भी नहीं सुनी। गुस्सा और जिद साफ झलकती है। पर शायद उसके पास कोई मजबूरी हो। हमें पूरी कहानी पता चलनी बाकी है। पोशाक भी बहुत अच्छी है। नीला सूट उसे बहुत सूट करता है। देखने वाले को बांधे रखता है।
लड़की जब गलियारे में चलती है तो बहुत अकेली लगती है। फिर डॉक्टर आता है और सहारा देता है। झूठी कसम, सच्ची लगन में ये पल बहुत सुकून देने वाला है। उसकी मुस्कान देखकर लगता है सब ठीक हो जाएगा। डॉक्टर का किरदार बहुत भरोसेमंद लगता है। सफेद कोट में वो बहुत अच्छे लग रहे हैं। रोशनी का इस्तेमाल बहुत खूबसूरत है। ये दृश्य दिल को छू लेता है। ऐसी कहानियां हमें उम्मीद देती हैं।
शुरू का दृश्य बहुत तनावपूर्ण है। महिला की चिंता साफ दिख रही है। झूठी कसम, सच्ची लगन की शुरुआत ही धमाकेदार है। वो लड़के का हाथ पकड़ती है पर वो रुकता नहीं। ये दिखाता है कि रिश्ते में दरार आ चुकी है। कमरे की सजावट बहुत शाही है। पर अंदर का शोर बहुत तेज है। हर किरदार अपनी जगह सही है। मुझे ये किरदार बहुत पसंद आए। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी ये देखना बाकी है।
फोन वाली तस्वीर कहानी की कुंजी लगती है। लड़का उसे देखकर चुप हो जाता है। झूठी कसम, सच्ची लगन में राज धीरे धीरे खुलते हैं। वो लड़की कौन है ये जानना जरूरी है। लड़के की आंखों में हैरानी है। शायद उसे कुछ नया पता चला है। ये सस्पेंस बनाए रखता है। मुझे ऐसी कहानी बहुत पसंद हैं। हर कड़ी में नया खुलासा होता है। देखने का मज़ा दोगुना हो जाता है।