शुरुआत का विवाह प्रस्ताव बहुत ही दिल को छू लेने वाला है। जब वह समारोह स्थल में घुटनों पर बैठकर अंगूठी निकालता है, तो माहौल जादुई हो जाता है। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी में यह पल सबसे खास है। भीड़ की तालियों के बीच उनका प्यार साफ़ दिखता है। इस्ला की खुशी साफ़ झलक रही है जब वह उसकी बाहों में जाती है। यह पल किसी सपने जैसा लगता है। सब लोग उनकी खुशी में शामिल होते हैं।
तीन दिन बाद का दृश्य शहर के ऊपर से दिखाया गया है। गिरजाघर का दृश्य बहुत शांत और सुंदर लग रहा है। झूठी कसम, सच्ची लगन में समय का बदलाव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। आसमान में बादल और नीचे भीड़ भाड़ वाली सड़कें कहानी को आगे बढ़ाती हैं। यह संक्रमण दर्शकों को अगले बड़े क्षण के लिए तैयार करता है। विवाह की तैयारियां शुरू होने वाली हैं। अब सब कुछ सपने जैसा लग रहा है।
गिरजाघर के अंदर दो माताओं की बातचीत बहुत भावुक है। एमा और ईशिता राठौर का मिलना दिल को छू लेता है। झूठी कसम, सच्ची लगन में परिवार का समर्थन बहुत जरूरी है। सफेद और लाल साड़ी में दोनों बहुत सुंदर लग रही हैं। उनकी आंखों में खुशी और थोड़ी चिंता भी दिख रही है। यह दृश्य बताता है कि शादी सिर्फ दो लोगों का नहीं, परिवार का भी होता है। सबका आशीर्वाद मिल रहा है।
दुल्हन के आने का पल किसी सपने से कम नहीं है। दरवाजे खुलते ही सूरज की रोशनी आती है और आरोही सामने खड़ी होती है। झूठी कसम, सच्ची लगन में यह प्रवेश बहुत शानदार है। उसकी सफेद पोशाक और चेहरे पर मासूमियत देखते ही बनती है। दूल्हा उसे देखकर मुस्कुराता है। यह पल हर लड़की का सपना होता है। प्रकाश का प्रयोग बहुत अच्छा है।
दूल्हा अपने काले कोट में बहुत आकर्षक लग रहा है। जब वह गिरजाघर की राह में चलता है, तो उसका आत्मविश्वास देखने लायक है। झूठी कसम, सच्ची लगन की कहानी में उसका धैर्य सराहनीय है। वह अपनी होने वाली पत्नी का इंतज़ार कर रहा है। पृष्ठभूमि में प्रकाश व्यवस्था बहुत अच्छी है। यह दृश्य पुरुषों के लिए भी प्रेरणादायक है। उसकी आंखों में चमक है।