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तूफान: पिता के कंधेवां17एपिसोड

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तूफान: पिता के कंधे

राजेंद्र वर्मा एक मछली वाला है, लेकिन असल में वह एक अरबपति है। उसका बेटा करण साधारण जिंदगी जीता है। लक्की सिंह, करण की मंगेतर ज्योति के साथ मिलकर, एक छोटी सी टक्कर का बदला लेने के लिए करण को ब्लैकमेल करता है और उसकी जान लगभग ले ही लेता है। राजेंद्र आखिरी वक्त पर करण को बचाता है, लेकिन सच सामने आने पर पता चलता है कि असली गद्दार उसका अपना भरोसेमंद दोस्त है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गोदाम में तनाव का माहौल

इस दृश्य में गोदाम का वातावरण बेहद डरावना है। जहाँ एक तरफ घायल पिता खड़ा है, वहीं दूसरी तरफ सूट पहने व्यक्ति का अहंकार साफ दिख रहा है। तूफान: पिता के कंधे नामक इस शो में दिखाया गया है कि कैसे एक बाप को मजबूरी में अपने बेटे से बात करनी पड़ती है। फोन पर हुई बातचीत ने पूरे माहौल को बदल दिया। दर्शक के रूप में यह देखना दिल दहला देने वाला था कि कैसे एक पिता अपनी बेबसी को छिपाकर मुस्कुराने की कोशिश कर रहा है।

अहंकार बनाम मजबूरी

सूट वाले शख्स की हंसी और घायल पिता का दर्द एक ही फ्रेम में कैद हो गया है। तूफान: पिता के कंधे की कहानी में यह मोड़ बहुत ही भावुक कर देने वाला है। जब विलासिता में रहने वाले लोग किसी की मजबूरी पर हंस रहे होते हैं, तब उस पिता का चेहरा सब कुछ कह रहा है। फोन कॉल के दौरान उसकी आंखों में आंसू और होठों पर जबरदस्ती लाई गई मुस्कान ने मेरा दिल जीत लिया। यह दृश्य साबित करता है कि असली ताकत पैसे में नहीं, रिश्तों में होती है।

फोन कॉल का नाटकीय मोड़

जब सूट वाले व्यक्ति ने फोन उठाया और बात शुरू की, तो पूरे गोदाम में सन्नाटा छा गया। तूफान: पिता के कंधे के इस एपिसोड में फोन कॉल सिर्फ एक संवाद नहीं, बल्कि एक हथियार बन गया है। घायल पिता का हर भाव बदलता हुआ दिखाई दिया। पहले वह डरा हुआ था, फिर निराश हुआ, और अंत में एक अजीब सी मुस्कान उसके चेहरे पर आ गई। यह बदलाव दिखाता है कि उसने अपने बेटे से क्या वादा किया होगा या क्या सच सुना होगा। बहुत ही शानदार अभिनय है।

पिता का त्याग और दर्द

इस वीडियो क्लिप में पिता का किरदार सबसे ज्यादा प्रभावशाली लगा। चेहरे पर खून के निशान और कपड़े फटे हुए हैं, लेकिन उसकी आंखों में अपने बेटे के लिए चिंता साफ झलक रही है। तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह संघर्ष हर उस बाप की कहानी है जो अपने परिवार के लिए कुछ भी सहने को तैयार रहता है। जब वह फोन पर बात करके मुस्कुराता है, तो लगता है कि उसने अपनी तकलीफ को अपने बेटे से छिपाने का फैसला कर लिया है। यह त्याग ही एक पिता की असली पहचान है।

खलनायक की क्रूर हंसी

सूट पहने हुए व्यक्ति की हंसी इस पूरे दृश्य की जान है। वह जिस तरह से घायल पिता का मजाक उड़ा रहा है और फोन पर बात करके उसे नीचा दिखा रहा है, वह बेहद घृणित है। तूफान: पिता के कंधे में इस विलेन का किरदार बहुत ही नफरत करने लायक बनाया गया है। उसकी आंखों में जो चमक है, वह जीत की नहीं, बल्कि दूसरों को तोड़ने की है। लेकिन अंत में जब पिता मुस्कुराता है, तो लगता है कि खेल अभी खत्म नहीं हुआ है। यह द्वंद्व दर्शकों को बांधे रखता है।

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