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तूफान: पिता के कंधेवां38एपिसोड

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तूफान: पिता के कंधे

राजेंद्र वर्मा एक मछली वाला है, लेकिन असल में वह एक अरबपति है। उसका बेटा करण साधारण जिंदगी जीता है। लक्की सिंह, करण की मंगेतर ज्योति के साथ मिलकर, एक छोटी सी टक्कर का बदला लेने के लिए करण को ब्लैकमेल करता है और उसकी जान लगभग ले ही लेता है। राजेंद्र आखिरी वक्त पर करण को बचाता है, लेकिन सच सामने आने पर पता चलता है कि असली गद्दार उसका अपना भरोसेमंद दोस्त है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

जेल के खाने में भी इंसानियत

तूफान: पिता के कंधे में यह दृश्य दिल को छू गया। कैदी नंबर ०५७६ अपने हाथों से खाना उठाकर दूसरे कैदियों को दे रहा है, जैसे वह कह रहा हो कि भूख सबकी एक जैसी होती है। जेल की सख्त दीवारों के बीच भी इंसानियत जिंदा है। यह छोटा सा एक्शन बड़े संदेश को दर्शाता है।

खामोशी में बड़ा संदेश

तूफान: पिता के कंधे का यह सीन बिना डायलॉग के भी बहुत कुछ कह जाता है। ०५७६ का चेहरा, उसकी आंखों में दर्द और फिर दूसरों के लिए खाना बांटना—यह सब एक पिता के त्याग को दर्शाता है। जेल में भी रिश्ते नहीं टूटते, बस रूप बदल लेते हैं।

खाने की थाली में छिपी कहानी

तूफान: पिता के कंधे में खाने की थाली सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि एक भावनात्मक पुल है। ०५७६ जब अपने हाथों से खाना उठाता है, तो लगता है जैसे वह अपने बच्चों को खिला रहा हो। जेल की ठंडी हवा में भी यह गर्माहट महसूस होती है।

जेल में भी पिता का प्यार

तूफान: पिता के कंधे में ०५७६ का किरदार एक पिता की तरह व्यवहार करता है, भले ही वह जेल में हो। वह दूसरे कैदियों को खाना देकर यह साबित करता है कि प्यार और देखभाल किसी भी दीवार से नहीं रुकती। यह दृश्य आंखों में आंसू ला देता है।

खामोश एक्टिंग, बड़ा असर

तूफान: पिता के कंधे में ०५७६ की खामोश एक्टिंग ने दिल जीत लिया। बिना एक शब्द कहे, उसने अपनी आंखों और हाथों से पूरी कहानी कह दी। जेल के खाने में भी वह प्यार बांट रहा है। यह दृश्य सिनेमा की ताकत को दर्शाता है।

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