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तूफान: पिता के कंधेवां43एपिसोड

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तूफान: पिता के कंधे

राजेंद्र वर्मा एक मछली वाला है, लेकिन असल में वह एक अरबपति है। उसका बेटा करण साधारण जिंदगी जीता है। लक्की सिंह, करण की मंगेतर ज्योति के साथ मिलकर, एक छोटी सी टक्कर का बदला लेने के लिए करण को ब्लैकमेल करता है और उसकी जान लगभग ले ही लेता है। राजेंद्र आखिरी वक्त पर करण को बचाता है, लेकिन सच सामने आने पर पता चलता है कि असली गद्दार उसका अपना भरोसेमंद दोस्त है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

जेल की दीवारों के बीच छिपा दर्द

तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया है कि कैसे एक पिता अपनी बेटी के लिए सब कुछ त्याग देता है। जेल के अंदर का माहौल इतना वास्तविक लगता है कि दर्शक खुद को उसी कोठरी में महसूस करने लगते हैं। 0576 नंबर वाले कैदी की आंखों में छिपा दर्द और गुस्सा देखकर दिल दहल जाता है।

पत्र ने बदल दी कहानी

जब 0571 ने वह पत्र 0576 को दिया, तो लगा जैसे समय थम गया हो। तूफान: पिता के कंधे में यह दृश्य सबसे भावुक है। एक कागज के टुकड़े ने इतनी गहरी भावनाएं कैसे जगा दीं, यह देखकर हैरानी होती है। हर शब्द में एक कहानी छिपी थी।

कोठरी नंबर 109 का रहस्य

नीले दरवाजे पर लिखा '109' और ऊपर 'कक्ष' का बोर्ड देखकर लगा जैसे यह जगह किसी रहस्य को छिपाए हुए है। तूफान: पिता के कंधे में हर छोटी चीज का महत्व है। 0570 का चेहरा देखकर लगा कि वह कुछ छिपा रहा है।

स्ट्राइप्ड यूनिफॉर्म की ताकत

नीले यूनिफॉर्म पर सफेद-काली पट्टियां सिर्फ कपड़े नहीं, बल्कि एक पहचान हैं। तूफान: पिता के कंधे में हर कैदी का नंबर उसकी कहानी बताता है। 0574 का डरा हुआ चेहरा और 0576 का गुस्सा देखकर लगा कि हर नंबर के पीछे एक तूफान छिपा है।

खिड़की से झांकती उम्मीदें

जब 0576 ने दरवाजे की खिड़की से बाहर झांका, तो लगा जैसे वह आजादी को छूना चाहता हो। तूफान: पिता के कंधे में यह दृश्य सबसे दिल को छू लेने वाला है। जेल की सलाखों के पीछे भी उम्मीदें जिंदा रहती हैं।

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