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तूफान: पिता के कंधेवां9एपिसोड

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तूफान: पिता के कंधे

राजेंद्र वर्मा एक मछली वाला है, लेकिन असल में वह एक अरबपति है। उसका बेटा करण साधारण जिंदगी जीता है। लक्की सिंह, करण की मंगेतर ज्योति के साथ मिलकर, एक छोटी सी टक्कर का बदला लेने के लिए करण को ब्लैकमेल करता है और उसकी जान लगभग ले ही लेता है। राजेंद्र आखिरी वक्त पर करण को बचाता है, लेकिन सच सामने आने पर पता चलता है कि असली गद्दार उसका अपना भरोसेमंद दोस्त है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

गोदाम में तूफान

इस दृश्य में भावनाओं का इतना बड़ा विस्फोट हुआ कि सांस रुक गई। जब पिता ने चेक फाड़ा, तो लगा जैसे उसने अपनी आत्मा को चीर दिया हो। तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह संघर्ष दिल को छू लेता है। हर चेहरे पर दर्द और गुस्सा साफ दिख रहा था।

टूटी उम्मीदें

जब वह कागज के टुकड़े जमीन पर गिरे, तो लगा जैसे सपने टूट रहे हों। तूफान: पिता के कंधे ने दिखाया कि कैसे एक बाप अपने बेटे के लिए सब कुछ दांव पर लगा देता है। उसकी आंखों में आंसू और चेहरे पर गुस्सा देखकर रोंगटे खड़े हो गए।

पिता का त्याग

इस शॉर्ट ड्रामा में पिता का किरदार इतना ताकतवर है कि देखते ही आंखें नम हो जाती हैं। तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया संघर्ष हर उस इंसान की कहानी है जो अपने परिवार के लिए लड़ता है। उसकी आवाज में दर्द और आंखों में उम्मीद थी।

गुस्से का विस्फोट

जब उसने चेक फाड़ा, तो लगा जैसे पूरा गोदाम हिल गया हो। तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह दृश्य इतना तीव्र था कि सांस रुक गई। हर किरदार की प्रतिक्रिया सही मायने में दिल को छू लेती है। यह सिर्फ एक ड्रामा नहीं, एक अनुभव है।

टूटे सपने

जमीन पर बिखरे कागज के टुकड़े देखकर लगा जैसे सपने टूट रहे हों। तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह दृश्य इतना भावुक था कि आंखें नम हो गईं। हर किरदार की प्रतिक्रिया सही मायने में दिल को छू लेती है। यह सिर्फ एक ड्रामा नहीं, एक अनुभव है।

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