इस दृश्य में तनाव इतना अधिक है कि सांस लेना मुश्किल हो जाता है। विलासिता से सजे खलनायक की हंसी और बेचारे शिकार की पीड़ा का विरोधाभास दिल दहला देता है। जब वह मछली को उठाता है तो लगता है जैसे वह अपनी ताकत दिखा रहा हो लेकिन अंत में पिता का आगमन सब कुछ बदल देता है। तूफान। पिता के कंधे में यह मोड़ बहुत ही शानदार है जहां कमजोर लगने वाला पात्र अचानक शक्तिशाली बन जाता है।
जब वह बूढ़ा आदमी दरवाजे से दौड़ता हुआ आता है तो पूरा माहौल बदल जाता है। उसकी आंखों में गुस्सा और बेटे के लिए चिंता साफ दिख रही थी। खलनायक जो मजाक उड़ा रहा था अब उसका चेहरा पीला पड़ गया है। यह दृश्य साबित करता है कि एक पिता अपने बच्चे के लिए क्या कर सकता है। तूफान। पिता के कंधे की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा यादगार है जहां न्याय की उम्मीद जाग उठती है।
गोल्डन सूट वाले शख्स का व्यवहार सच में घिनौना है। वह इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार कर रहा है जैसे वे खिलौने हों। मछली और जड़ी बूटियों वाला डिब्बा देखकर लगता है कि वह कोई अजीब प्रयोग कर रहा है। लेकिन जब बंधे हुए लड़के की आंखों में डर दिखता है तो दर्शक के रूप में हम भी बेचैन हो जाते हैं। तूफान। पिता के कंधे में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं।
सफेद साड़ी वाली महिला की मुस्कान में एक अजीब सी चालाकी है जबकि दूसरी लड़की की आंखों में आंसू और डर साफ झलक रहा है। दोनों के बीच का अंतर इस कहानी की गहराई को दिखाता है। जब खलनायक लड़की को पकड़ता है तो लगता है कि अब सब खत्म हो गया लेकिन पिता का आना एक नई उम्मीद लेकर आता है। तूफान। पिता के कंधे में महिला किरदारों को भी अच्छे से दिखाया गया है।
जब वह आदमी मछली को जमीन पर पटकता है तो लगता है कि वह अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। लेकिन असली ताकत तो उस बूढ़े आदमी में है जो अपने बेटे को बचाने के लिए कुछ भी कर सकता है। इस दृश्य में गुस्सा डर और उम्मीद सब कुछ है। तूफान। पिता के कंधे की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा दमदार है जहां एक पिता का प्यार सब कुछ जीत लेता है।