PreviousLater
Close

तूफान: पिता के कंधेवां27एपिसोड

like2.0Kchase2.0K

तूफान: पिता के कंधे

राजेंद्र वर्मा एक मछली वाला है, लेकिन असल में वह एक अरबपति है। उसका बेटा करण साधारण जिंदगी जीता है। लक्की सिंह, करण की मंगेतर ज्योति के साथ मिलकर, एक छोटी सी टक्कर का बदला लेने के लिए करण को ब्लैकमेल करता है और उसकी जान लगभग ले ही लेता है। राजेंद्र आखिरी वक्त पर करण को बचाता है, लेकिन सच सामने आने पर पता चलता है कि असली गद्दार उसका अपना भरोसेमंद दोस्त है।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

कांच के उस पार का संघर्ष

जेल की सलाखों के पीछे कैद नंबर ०५७४ की आँखों में जो चमक है, वो किसी अपराधी की नहीं बल्कि एक पिता की मजबूरी की लगती है। सामने खड़ा सूट पहना व्यक्ति शायद उसका बेटा है, जिसके चेहरे पर गुस्सा और निराशा साफ़ झलक रही है। तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह दृश्य दिल को छू लेता है जब एक बाप अपने बेटे को समझाने की कोशिश करता है, लेकिन शब्द कांच की दीवार में अटक जाते हैं। पीछे खड़ी महिला की चुप्पी इस तनाव को और गहरा कर देती है।

खामोशी का शोर

इस सीन में डायलॉग से ज्यादा एक्टिंग बोल रही है। नंबर ०५७४ का चेहरा देखकर लगता है कि वो अपने अतीत के बोझ तले दबा हुआ है, फिर भी उम्मीद की किरण ढूंढ रहा है। सामने वाला युवक शायद उसकी गलतियों का परिणाम भुगत रहा है और इसलिए क्रोधित है। तूफान: पिता के कंधे की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम लगता है जहाँ रिश्तों की डोर टूटने के कगार पर है। जेल का माहौल और कांच की दीवार इन दोनों के बीच की दूरी को बहुत खूबसूरती से दर्शाती है।

पिता और पुत्र का टकराव

जब नंबर ०५७४ उंगली उठाकर कुछ समझा रहा होता है, तो लगता है जैसे वो अपने बेटे से माफ़ी मांग रहा हो या कोई राज़ खोल रहा हो। सामने खड़े युवक की मुट्ठी बंधी हुई है, जो उसके दबे हुए गुस्से को दिखाती है। तूफान: पिता के कंधे में इस तरह के इमोशनल सीन्स देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। पीछे खड़ी सफेद साड़ी वाली महिला शायद माँ है, जो इस टकराव को चुपचाप सह रही है। यह दृश्य परिवारिक कलह की सबसे सच्ची तस्वीर है।

कांच की दीवारें और टूटे सपने

जेल की ठंडी दीवारों के बीच एक गर्माहट है जो इन तीन पात्रों के बीच के रिश्ते से आ रही है। नंबर ०५७४ की हंसी शायद अपने दर्द को छुपाने का एक तरीका है, जबकि सामने वाला व्यक्ति उस दर्द का सबब बन चुका है। तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह टकराव बहुत ही रोंगटे खड़े करने वाला है। कैमरा एंगल और एक्टर्स के एक्सप्रेशन ने इस सीन को यादगार बना दिया है। ऐसा लगता है कि अगले ही पल कुछ बड़ा होने वाला है।

अनकही बातों का बोझ

नंबर ०५७४ और सामने खड़े युवक के बीच की खामोशी शोर मचा रही है। ऐसा लगता है कि दोनों एक दूसरे को समझना चाहते हैं लेकिन परिस्थितियां उन्हें रोक रही हैं। तूफान: पिता के कंधे की कहानी में यह वह पल है जहाँ अहं और भावनाओं की लड़ाई हो रही है। पीछे खड़ी महिला की आँखों में आंसू हैं जो वो बहा नहीं पा रही। यह सीन दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता है कि क्या सही और क्या गलत।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down