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तूफान: पिता के कंधेवां35एपिसोड

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तूफान: पिता के कंधे

राजेंद्र वर्मा एक मछली वाला है, लेकिन असल में वह एक अरबपति है। उसका बेटा करण साधारण जिंदगी जीता है। लक्की सिंह, करण की मंगेतर ज्योति के साथ मिलकर, एक छोटी सी टक्कर का बदला लेने के लिए करण को ब्लैकमेल करता है और उसकी जान लगभग ले ही लेता है। राजेंद्र आखिरी वक्त पर करण को बचाता है, लेकिन सच सामने आने पर पता चलता है कि असली गद्दार उसका अपना भरोसेमंद दोस्त है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

जेल में पत्तों का खेल खतरनाक मोड़ लेता है

तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह दृश्य सचमुच रोंगटे खड़े कर देने वाला है। कैदियों के बीच पत्तों का खेल शुरू होता है, लेकिन जल्द ही यह एक गंभीर झगड़े में बदल जाता है। ०५६४ नंबर वाले कैदी का गुस्सा और ०५७४ पर हमला देखकर लगता है कि जेल की दीवारों के पीछे कितनी जटिल कहानियां छिपी हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं - डर, गुस्सा, और चिंता। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे छोटी सी बात बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।

पत्तों से शुरू हुआ झगड़ा जानलेवा हो गया

तूफान: पिता के कंधे का यह एपिसोड सचमुच दिलचस्प है। कैदियों के बीच पत्तों का खेल शुरू होता है, लेकिन जल्द ही यह एक गंभीर झगड़े में बदल जाता है। ०५६४ नंबर वाले कैदी का गुस्सा और ०५७४ पर हमला देखकर लगता है कि जेल की दीवारों के पीछे कितनी जटिल कहानियां छिपी हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं - डर, गुस्सा, और चिंता। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे छोटी सी बात बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।

जेल की दीवारों के पीछे छिपी कहानियां

तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह दृश्य सचमुच रोंगटे खड़े कर देने वाला है। कैदियों के बीच पत्तों का खेल शुरू होता है, लेकिन जल्द ही यह एक गंभीर झगड़े में बदल जाता है। ०५६४ नंबर वाले कैदी का गुस्सा और ०५७४ पर हमला देखकर लगता है कि जेल की दीवारों के पीछे कितनी जटिल कहानियां छिपी हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं - डर, गुस्सा, और चिंता। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे छोटी सी बात बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।

पत्तों का खेल जब जानलेवा हो जाता है

तूफान: पिता के कंधे का यह एपिसोड सचमुच दिलचस्प है। कैदियों के बीच पत्तों का खेल शुरू होता है, लेकिन जल्द ही यह एक गंभीर झगड़े में बदल जाता है। ०५६४ नंबर वाले कैदी का गुस्सा और ०५७४ पर हमला देखकर लगता है कि जेल की दीवारों के पीछे कितनी जटिल कहानियां छिपी हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं - डर, गुस्सा, और चिंता। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे छोटी सी बात बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।

जेल में दोस्ती और दुश्मनी की लकीरें

तूफान: पिता के कंधे में दिखाया गया यह दृश्य सचमुच रोंगटे खड़े कर देने वाला है। कैदियों के बीच पत्तों का खेल शुरू होता है, लेकिन जल्द ही यह एक गंभीर झगड़े में बदल जाता है। ०५६४ नंबर वाले कैदी का गुस्सा और ०५७४ पर हमला देखकर लगता है कि जेल की दीवारों के पीछे कितनी जटिल कहानियां छिपी हैं। हर चेहरे पर अलग-अलग भावनाएं हैं - डर, गुस्सा, और चिंता। यह दृश्य दिखाता है कि कैसे छोटी सी बात बड़े संघर्ष का कारण बन सकती है।

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