काले वस्त्रों वाले साधु के हाथ में नीला घड़ा देखकर ही रोंगटे खड़े हो गए। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार में ऐसे दृश्य ही तो जादूई लगते हैं। जब उसने घड़े से बैंगनी धुआं निकाला, तो लगा जैसे कोई प्राचीन शक्ति जाग उठी हो। उसकी मुस्कान में छिपा खतरा और आंखों में चमक दर्शकों को बांधे रखती है।
सफेद पोशाक वाली युवती की आंखों में डर और बेबसी साफ झलक रही थी। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के इस दृश्य में जब काले वस्त्रों वाले साधु ने उसे पकड़ा, तो दिल धक से रह गया। उसकी चीख और संघर्ष देखकर लगा जैसे कोई निर्दोष फंस गया हो। ऐसे दृश्य दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हैं।
नीले वस्त्रों वाले युवक के चेहरे पर हैरानी और चिंता साफ दिख रही थी। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार में जब काले वस्त्रों वाले साधु ने जादू किया, तो उसकी आंखें फैल गईं। उसकी प्रतिक्रिया इतनी प्राकृतिक थी कि लगा जैसे वह सचमुच उस स्थिति में फंस गया हो। ऐसे अभिनय से कहानी और भी रोचक हो जाती है।
जब काले वस्त्रों वाले साधु ने घड़े से बैंगनी धुआं निकाला, तो पूरा दृश्य रहस्यमयी हो गया। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार में ऐसे विशेष प्रभाव देखकर लगा जैसे कोई प्राचीन जादू चल रहा हो। धुएं का रंग और उसका फैलना इतना सुंदर था कि आंखें नहीं हट रही थीं। ऐसे दृश्य फिल्म को एक अलग ही स्तर पर ले जाते हैं।
सफेद वस्त्रों वाले युवक का प्रवेश इतना शांत और गरिमामय था कि लगा जैसे कोई देवता उतर आया हो। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार में जब वह सामने आया, तो उसकी आंखों में एक अलग ही चमक थी। उसकी उपस्थिति से पूरे दृश्य में एक नई ऊर्जा आ गई। ऐसे पात्र कहानी को नई दिशा देते हैं।