जब वह नीले वस्त्रों वाला योद्धा फर्श पर गिरा, तो सबकी सांसें थम गईं। रानी का चेहरा बर्फ जैसा ठंडा था, पर उसकी आंखों में आग थी। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार का दृश्य याद आ गया जब वह खड़ा हुआ और रानी के पास गया। यह संघर्ष सिर्फ शब्दों का नहीं, बल्कि दो दिलों का टकराव था जो इतिहास बदल देगा।
गंभीर माहौल में अचानक ये तीनों कैसे खाने लग गए? एक के हाथ में मक्का, दूसरे के पास कुछ और। यह दृश्य 'मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार' की याद दिलाता है जहां खतरे के बीच भी हंसी नहीं रुकती। इनकी दोस्ती और बेफिक्री देखकर लगता है कि ये ही असली हीरो हैं जो तनाव को हंसी में बदल देते हैं।
काले वस्त्रों वाली रानी जब सिंहासन से उठी, तो पूरा दरबार कांप उठा। उसने उस नीले वस्त्रों वाले को पकड़ा, न गुस्से में, न नफरत में, बल्कि एक अजीब से लगाव में। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार वाली लड़ाई से ज्यादा खतरनाक यह भावनात्मक युद्ध था। क्या वह उसे माफ करेगी या सजा देगी? यह सवाल सबके मन में था।
वह बैंगनी पोशाक पहने व्यक्ति पूरे समय चुपचाप खड़ा रहा, पर उसकी आंखें सब कुछ देख रही थीं। जब वह बोला, तो उसकी आवाज में एक अजीब सा दर्द था। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार के बाद की शांति जैसा माहौल था, जहां हर शब्द भारी पड़ रहा था। वह किसी राज का हिस्सा लग रहा था जो अभी खुलना बाकी है।
सफेद फर कोट और हरे वस्त्रों वाली वह युवती जब तलवार लेकर आगे बढ़ी, तो लग रहा था जैसे कोई देवी उतर आई हो। उसकी आंखों में आंसू थे, पर हाथ में तलवार मजबूत थी। मदहोशी में तलवार से राक्षस संहार की याद ताजा कर देने वाला यह दृश्य था। वह किसका बचाव कर रही थी? यह सवाल सबको परेशान कर रहा था।